सुशासन सप्ताह 2025: बारां में सुशासन नवाचारों पर गहन मंथन, प्रकृति से सीखने का संदेश
सुशासन सप्ताह 2025 के तहत बारां जिले में मिनी सचिवालय सभागार में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. एस.पी. सिंह ने संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुशासन की आधारशिला बताते हुए प्रकृति से सीख लेने का आह्वान किया। कार्यशाला में जिले के नवाचारों और विजन 2047 पर चर्चा की गई।

बारां। राज्य सरकार के सफलतापूर्वक दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सुशासन सप्ताह 2025 के अंतर्गत मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित मिनी सचिवालय सभागार में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिले में सुशासन से जुड़े नवाचारों पर विमर्श करना तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उपायों पर मंथन करना रहा। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. एस.पी. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. एस.पी. सिंह ने कहा कि सुशासन की अवधारणा कोई नई नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता की शुरुआत से ही श्रेष्ठ व्यवस्था की खोज का परिणाम रही है। उन्होंने प्रशासन के लिए प्रकृति को सबसे आदर्श मॉडल बताते हुए कहा कि सृजन, संरक्षण, दिन-रात का संतुलन, ऋतु परिवर्तन, पूर्वानुमान और नियंत्रण—ये सभी सुशासन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य या देश के विकास की आधारशिला मजबूत कानून व्यवस्था पर ही टिकी होती है और प्रशासन का मूल उद्देश्य व्यवस्था को बनाए रखना है।
डॉ. सिंह ने कहा कि संवेदनशीलता सुशासन की पहली सीढ़ी है। उपलब्ध संसाधनों का यथार्थ मूल्यांकन कर उनका जनहित में उपयोग करना ही सुशासन की पहचान है। उन्होंने जनभागीदारी को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि प्रशासनिक योजनाओं में नागरिकों की अधिक सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक सशक्त होता है। ग्राम सभाओं का नियमित आयोजन, अधिकारियों के ग्राम भ्रमण और रात्रि चौपाल जैसे प्रयास प्रशासन को जमीनी हकीकत से जोड़ते हैं और शासन की वास्तविक स्थिति से रूबरू कराते हैं।
पारदर्शिता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ही सुशासन है और इसके अभाव में भ्रष्टाचार पनपता है। आधुनिक तकनीक के युग में ई-गवर्नेंस, सूचना का अधिकार, इंटरनेट और मोबाइल तकनीक के माध्यम से शासन में पारदर्शिता लाना संभव हुआ है। इससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को बढ़ावा मिला है और आमजन तक सरकारी सेवाएं सरल एवं सुगमता से पहुंच रही हैं। जवाबदेही को सुशासन का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्षित वर्ग तक वास्तविक लाभ पहुंचने की सुनिश्चितता होती है।
डॉ. सिंह ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं और अनावश्यक लालफीताशाही पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यही भ्रष्टाचार और विलंब को जन्म देती हैं। उन्होंने कहा कि जब निजी क्षेत्र पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य कर सकता है, तो सरकारी तंत्र में भी ऐसा संभव है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आमजन को न्याय दिलाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि त्वरित न्याय सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि न्याय में विलंब अन्याय के समान है।
भारतीय सुशासन परंपरा का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में सुशासन का मूल भाव “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” में निहित है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में जनकल्याण को सर्वोपरि माना गया है, वहीं महात्मा गांधी का ‘स्वराज’ और ‘सर्वोदय’ भी सुशासन की अवधारणा को सुदृढ़ रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी विशेष बल दिया तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा द्वारा किए जा रहे सुशासन प्रयासों की सराहना की।
कार्यशाला में जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए जिले में किए जा रहे सुशासन संबंधी नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मंशानुरूप जिले में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। सुशासन सप्ताह के अंतर्गत ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान और ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे शासन की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस का अर्थ गुणवत्ता, सत्यता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ सेवा प्रदान करना है।
इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के सहायक निदेशक योगेन्द्र शर्मा ने सुशासन/100 के तहत बारां जिले का विजन 2047 डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव सक्सेना ने स्वास्थ्य सेवाओं में किए गए नवाचारों पर प्रकाश डाला, जबकि वाटरशेड एसई मनोज पूर्वगोला ने जिले में जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यशाला में विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारी, पत्रकारगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सुशासन सप्ताह 2025 के तहत आयोजित यह कार्यशाला न केवल प्रशासनिक सुधारों पर गंभीर चिंतन का मंच बनी, बल्कि प्रकृति, परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय से सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में जिले के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।
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Pratahkal Bureau
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