बारां। भारत को पुनः 'विश्वगुरु' बनाने के संकल्प और ग्रामीण शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य के साथ जिला बारां के आचार्यों के लिए आदर्श विद्या मंदिर, छबड़ा में पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण वर्ग का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह के साथ ही छबड़ा क्षेत्र के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में संचालित 30 एकल विद्यालयों की ग्राम समितियों के कार्यकर्ताओं के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण वर्ग का भी आयोजन संपन्न हुआ।

समारोह का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्ज्वलन और मां भारती की वंदना के साथ हुआ, जिससे पूरे परिसर में भक्तिमय और ऊर्जावान वातावरण का निर्माण हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने एकल अभियान की कार्यप्रणाली और राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

राजस्थान संभाग के प्रशिक्षण प्रमुख सुरेश शर्मा ने एकल अभियान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि 'पंच शिक्षा' — प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य, ग्राम विकास, जागरण और संस्कार — भारत के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने आचार्यों को संदेश दिया कि विश्वगुरु बनने का मार्ग स्वयं सुधार और समर्पण से होकर गुजरता है।

आचार्य परमानंद (संरक्षक, राजस्थान) ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर बल देते हुए आचार्यों को अनुशासन और कठोर दिनचर्या अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठतम आचार्य बनने का संकल्प लेना चाहिए।

डॉ. सुरेश मेघवाल (जिला अध्यक्ष, बारां) ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया और ग्राम समितियों के गठन की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने आचार्यों को पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण लेने हेतु प्रोत्साहित किया। इसके अलावा, मनोहर लाल (प्राथमिक शिक्षा प्रभारी, P7) ने अभियान की आर्थिक पारदर्शिता और समिति सदस्यों के दायित्वों पर प्रकाश डाला, ताकि सभी कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।

प्रशिक्षण वर्ग की सफलता में छबड़ा के समाजसेवी सुरेश गुप्ता और धर्मप्रकाश जैन ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को संस्कारवान शिक्षा की आवश्यकता है, और एकल अभियान इस कमी को पूरा कर रहा है। अंचल अभियान प्रमुख लक्ष्मीनारायण एवं प्रशिक्षण प्रमुख प्रियंका चक्रधारी ने सभी आगंतुकों का तिलक और अक्षत से स्वागत किया।

प्रशिक्षण के दौरान केवल कौशल विकास ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों पर भी ध्यान दिया गया। कार्यक्रम के दौरान दो विशेष दिवस मनाए गए: तुलसी पूजन दिवस और बालवीर बलिदान दिवस। आचार्य परमानंद ने इन दोनों दिवसों के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से समझाया।

सत्र के मध्य एक प्रश्नोत्तरी और शंका समाधान सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें कार्यकर्ताओं ने कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। जिला कोषाध्यक्ष चतुर्भुज सुमन, शिक्षा प्रभारी नरेश नागर, और सदस्य शिवराज सहित सभी कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में सक्रिय योगदान दिया।

आयोजन समिति के संयोजक रामनिवास, जमनालाल और संच प्रमुख रीना नागर ने सभी का आभार व्यक्त किया और आश्वस्त किया कि पांच दिवसीय प्रवास के दौरान व्यवस्थाओं में कोई कमी नहीं रहेगी।

सत्र के समापन पर यह निर्णय लिया गया कि आगामी विवेकानंद जयंती, मकर संक्रांति और गणतंत्र दिवस हर गांव में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सभी आचार्यों और कार्यकर्ताओं ने एकल अभियान के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अपना सर्वोत्तम योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और रामायण की पावन चौपाइयों के गान के साथ हुआ, जिससे पूरे परिसर में सकारात्मकता का संचार हुआ।

Pratahkal Bureau

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