आज़ादी के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के बीच स्वयंसेवक डॉ. सुरेश मेघवाल का शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुआ है। उनके रिसर्च पेपर “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकसित भारत: 2047 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान” में विकसित भारत के लक्ष्य और उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

शोध में स्पष्ट किया गया है कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक विकास, सामाजिक उत्थान, युवा भागीदारी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे लक्ष्यों पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें आरएसएस की व्यापक भूमिका रही है। संगठन की स्थापना 1925 में डॉ केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। शोध के अनुसार राष्ट्र निर्माण में आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक सेवा, आपदा राहत, शिक्षा, सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक समरसता, संगठन, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता के क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्य किए हैं।

रिसर्च पेपर में विकसित भारत 2047 को एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत को समृद्ध, आत्मनिर्भर, समावेशी और बौद्धिक रूप से प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। डॉ. मेघवाल का उल्लेख है कि वे बचपन से संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और विद्यार्थी जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। उन्होंने एम.फिल और नेट के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त की।

सनातनी विचारधारा से प्रेरित होकर उन्हें विश्व हिंदू परिषद के धर्मप्रसार में जिला संयोजक की जिम्मेदारी मिली, जहां उनके कार्यकाल में युवा शक्ति सम्मेलन और मातृशक्ति सम्मेलन जैसे जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजनीति विज्ञान में पीएचडी के बाद वे भारतीय इतिहास संकलन समिति के इकाई अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं और यूरोपीय इतिहासकारों द्वारा भारतीय इतिहास के गलत प्रस्तुतिकरण में सुधार के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

डॉ. मेघवाल के अनुसार उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, बालिका एवं महिला मानवाधिकारों की रक्षा और भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर कई रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं। अपने वर्तमान शोध में उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में आरएसएस की सनातनी नीति ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है। यह शोध विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के संबंध को अकादमिक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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