अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के क्षेत्रीय संगठन सचिव प्रोफेसर डॉ. एम.एल. साहू ने वर्तमान समय की आवश्यकता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय समाज में बालिका एवं महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका, वंचित वर्गों के त्याग और बलिदान तथा गुमनाम नायकों के योगदान को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय इतिहासकारों द्वारा स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के प्रयासों के चलते सनातनी इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत कर उसकी छवि धूमिल की गई है, जिसमें सुधार की आवश्यकता है।

डॉ. साहू ने स्पष्ट किया कि इतिहास का पुनर्लेखन का अर्थ इतिहास को बदलना नहीं है, बल्कि उपलब्ध प्राचीन साहित्य और ग्रंथों में मौजूद त्रुटियों एवं विकृतियों को सुधारना तथा नई शोध एवं खोजों को उसमें सम्मिलित करना है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के माध्यम से यह कार्य देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में निरंतर किया जा रहा है, जिसमें युवा इतिहासकार, महिला इतिहासकार और प्रबुद्ध वर्ग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अध्ययन की ओर अधिक आकर्षित हो रही है और पाश्चात्य प्रभाव से दूर होकर अपनी जड़ों को समझने के प्रति उत्सुक है। उनके अनुसार, इस प्रयास का उद्देश्य सनातन इतिहास को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर पुनः स्थापित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भारत के गौरवशाली अतीत से परिचित हो सकें।

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