बाड़ा। राजस्थान के इतिहास शोध क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें राजकीय कन्या महाविद्यालय, बाड़ा की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हेमलता वैष्णव ने अपने शोध पत्र के माध्यम से हाड़ौती क्षेत्र के ऐतिहासिक पहलुओं को उजागर किया। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली एवं महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाशन शोध केंद्र, मेहरानगढ़ जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में चौकेलाव महल, मेहरानगढ़ जोधपुर में आयोजित राजस्थान इतिहास कांग्रेस अधिवेशन में डॉ. वैष्णव ने कोटा रियासत के पिपलोदा गांव में ईसाई मिशनरियों द्वारा शिक्षा और धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने शोध पत्र में डॉ. वैष्णव ने बताया कि हाड़ौती क्षेत्र में छप्पनिया अकाल के समय ईसाई मिशनरियों ने स्कूल, अनाथालय और निःशुल्क अस्पताल खोलकर स्थानीय लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रदान की। इस माध्यम से मिशनरियों ने सामाजिक और धार्मिक प्रभाव का विस्तार किया। अधिवेशन में मुख्य अतिथि एच.एच. महारानी श्री हेमलता राज्ये जी साहिबा, मारवाड़ जोधपुर ने विशेष उपस्थिति दर्ज कराई। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के चेयरमैन प्रोफेसर रधुवेन्द्र तंवर के आतिथ्य में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

अधिवेशन में गुजरात, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और असम सहित अनेक राज्यों के प्रतिष्ठित इतिहासकारों ने भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम ज्ञानवर्धक और अंतरराज्यीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया। यह अधिवेशन न केवल क्षेत्रीय इतिहास की समझ को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक अध्ययन और शोध कार्यों को भी नई दिशा देता है।

डॉ. वैष्णव के शोध कार्य ने पिपलोदा गांव में मिशनरियों की शैक्षिक गतिविधियों और उनके ऐतिहासिक प्रभाव को व्यापक रूप से सामने लाया, जिससे हाड़ौती क्षेत्र के इतिहास पर अध्ययन करने वालों के लिए नई जानकारी और शोध संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ।

Pratahkal Bureau

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