भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि समय अब केवल “सलाह” का नहीं, बल्कि “सहयोग” का है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संगठन से जुड़ने वाला प्रत्येक सदस्य केवल उत्सव-मूर्ति बनकर नहीं, बल्कि सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में योगदान दे।

वे प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में आयोजित इतिहास संकलन समिति चित्तौड़ प्रांत की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उन्होंने कहा कि इतिहास संकलन योजना का मूल उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की श्रेष्ठता को पुनः स्थापित करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक सदस्य को अपनी भूमिका का निर्धारण करते हुए समर्पण भाव से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली, स्वाभिमानी और शौर्यपूर्ण इतिहास को जन-जन के मानस पटल पर पुनः स्थापित करने के लिए अभी कठोर तपस्या आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन के लिए “समय का दान” करने का आह्वान भी किया।

बैठक का शुभारंभ भारत माता एवं इतिहास पुरुष के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अध्यक्षता करते हुए इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने “धर्मो रक्षति रक्षितः” श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को सत्य, न्याय, कर्तव्यपरायणता और सदाचार के आधार पर व्यक्तित्व निर्माण पर बल देना चाहिए।

दो सत्रों में सम्पन्न इस बैठक के दूसरे सत्र में प्रांत अध्यक्ष प्रो. जीवन सिंह खरकवाल ने तीन वर्षों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपने बुजुर्गों की कहानियों को सुनकर उन्हें संकलित करना चाहिए, क्योंकि यही कार्य भारत के मूल इतिहास संकलन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

इसी क्रम में इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय मंत्री प्रो. शिव कुमार मिश्रा ने कहा कि दायित्व चाहे जैसा भी हो, यदि कार्यकर्ता उसे निष्ठा और समर्पण से निभाएं तो वही दायित्व उदाहरण बन जाता है।

राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन सचिव डॉ. मोहनलाल साहू ने संगठन को गति देने के लिए पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में प्रवास करने और वार्षिक कार्ययोजना के अनुरूप नियमित कार्य करने का आह्वान किया।

बैठक में कोटा संभाग से डॉ. आदित्य गुप्ता, डॉ. बाबूलाल भाट, डॉ. सुरेश मेघवाल, डॉ. हेमलता वैष्णव, जिला महासचिव नवनीत स्वरूप, जिला मंत्री यशोदा मेघवाल सहित महिला प्रमुख, युवा इतिहासकार, महिला इतिहासकार तथा कॉलेज इतिहासकारों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

बैठक में संगठन के उद्देश्यों, कार्ययोजना और भारतीय इतिहास के पुनर्संकलन की दिशा में व्यापक विचार-विमर्श किया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और दिशा का संचार हुआ।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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