बारां में कांग्रेस का बड़ा ऐलान: मनरेगा बचाने और मतदाता सूची दुरुस्त करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे कार्यकर्ता
बारां में जिला कांग्रेस कमेटी की अहम बैठक में विधायक प्रमोद जैन भाया ने भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा में किए जा रहे बदलावों को योजना बंद करने की साजिश करार दिया। कांग्रेस ने 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क और फरवरी तक जिला मुख्यालय पर धरने का ऐलान किया है। साथ ही, कार्यकर्ताओं को कटे हुए मतदाताओं के नाम पुनः जुड़वाने का विशेष निर्देश दिया गया है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

बारां। राजस्थान के बारां जिले में राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में आयोजित ब्लॉक, नगर और मंडल अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक में न केवल आगामी चुनावों की रणनीति तैयार की गई, बल्कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल भी फूंक दिया गया। पूर्व मंत्री और अंता विधायक प्रमोद जैन भाया ने इस दौरान कार्यकर्ताओं को एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी— "ऐसे योग्य मतदाता जिनके नाम सूची से काट दिए गए हैं, उन्हें प्राथमिकता से पुनः जुड़वाएं।" यह निर्देश आगामी पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों की दृष्टि से कांग्रेस का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
बैठक की शुरुआत कांग्रेस जिला संगठन महामंत्री कैलाश जैन के उद्बोधन से हुई, जिन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के ढांचे में भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे बदलावों को जनविरोधी करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी योजना के अस्तित्व को बचाने के लिए कांग्रेस अब गांव-गांव जाकर अलख जगाएगी। इस बैठक में अंता विधायक प्रमोद जैन भाया के साथ जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया और बारां-अटरू के पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया।
जिलाध्यक्ष रामचरण मीणा ने आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार जिले में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो चुका है। 10 जनवरी को प्रेस वार्ता और 11 जनवरी को महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष उपवास के बाद, अब 12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 तक जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में 'चौपाल' और 'जनसंपर्क' कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। संघर्ष का यह क्रम यहीं नहीं थमेगा; 30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने दिए जाएंगे, जिसमें संवैधानिक मूल्यों और 'काम के अधिकार' पर चर्चा होगी। इसके पश्चात 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला मुख्यालय पर जिला कलेक्टर कार्यालय के घेराव और धरने का निर्णय लिया गया है।
विधायक प्रमोद जैन भाया ने भाजपा की मंशा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा ग्रामीणों का पलायन रोकने के लिए शुरू की गई इस योजना की रीढ़ तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने वित्तीय गणित समझाते हुए कहा कि केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करना चाहती है, जबकि राज्य सरकार की हिस्सेदारी 10 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। भाया ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार, जो वर्तमान में पंचायतों की पुरानी किश्तें देने में ही विफल साबित हो रही है, पर इतना बड़ा आर्थिक बोझ डाला गया तो यह योजना स्वतः ही दम तोड़ देगी। इसका सीधा प्रहार उन गरीबों और मजदूरों पर होगा जो अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर हैं।
पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल ने मनरेगा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसकी सुरक्षा से समझौता करना अकुशल मजदूरों की आय छीनने जैसा है। वहीं, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर करते हुए कहा कि इस योजना में 50 प्रतिशत से अधिक भागीदारी महिलाओं की है, अतः योजना में कोई भी कटौती सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को बाधित करेगी। बैठक का समापन मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित एक सामूहिक स्नेहभोज के साथ हुआ, जिसने कार्यकर्ताओं के बीच आपसी एकजुटता का संदेश दिया। कांग्रेस का यह व्यापक अभियान आने वाले दिनों में बारां की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

Pratahkal Bureau
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