मुख्यालय के समीपवर्ती गांव बड़वा के निकट खेडिया में स्थित स्थानीय हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर सर्वेश्वरदास त्यागी महाराज के पावन सानिध्य में चल रही श्रीरामकथा के पाँचवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा पांडाल ‘राम’ नाम के जयघोष से गूंजायमान हो उठा और वातावरण पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर हो गया।

श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी अधिक रही कि पांडाल छोटा पड़ गया, जिसके कारण सैकड़ों भक्तों को बाहर बैठकर तथा खड़े होकर कथा का रसपान करना पड़ा। व्यासपीठ से कथा का रसवर्धन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि श्रीरामचरितमानस की एक-एक चौपाई गागर में सागर के समान है, जिसमें संसार, परिवार, व्यवहार और परलोक का पवित्र वर्णन समाहित है। उन्होंने कहा कि यह सभी ग्रंथों का सार है, जिसका श्रवण प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिए।

कथा प्रसंग में उन्होंने दशरथ जी के पुत्रों के नामकरण की व्याख्या करते हुए बताया कि संतान का नाम हमेशा गुरुमुखी और पंचांग के अनुसार रखा जाना चाहिए, क्योंकि नाम का प्रभाव जीवन पर सीधा पड़ता है। उन्होंने कहा कि नाम भी उपासना बन जाए, इसी उद्देश्य से वशिष्ठ जी ने विचारपूर्वक चारों भाइयों के दिव्य नाम रखे थे।

कार्यक्रम के अंत में आज की कथा आरती के मुख्य यजमान मनोज मालव रहे, जबकि यज्ञ के मुख्य यजमान महावीर जी मीणा टारडा का समिति द्वारा दुपट्टा एवं माला पहनाकर सम्मान किया गया। भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

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