बारां। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और जब अवसर राज्य स्तर का हो, तो जज्बा दोगुना हो जाता है। मध्य प्रदेश के देवास में आयोजित 'मास्टरमाइंड अबेकस' की स्टेट लेवल प्रतियोगिता में बारां के छात्र-छात्राओं ने अपनी बौद्धिक कुशाग्रता और सांस्कृतिक हुनर का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा आयोजन स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। चेतन मास्टरमाइंड अबेकस क्लासेस के तत्वावधान में बारां के नन्हे सितारों ने न केवल गणितीय गणनाओं में अपनी धाक जमाई, बल्कि कला के क्षेत्र में भी जिले का मान बढ़ाया।

प्रतियोगिता के तकनीकी पहलुओं और परिणामों की जानकारी देते हुए संस्थान के निदेशक चेतन प्रजापति ने बताया कि इस प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय स्पर्धा में बारां से कुल 34 विद्यार्थियों ने अपना दमखम दिखाया। प्रतियोगिता के कड़े मुकाबले में लेवल जीरो 'ए' के अंतर्गत चिरायु गौतम ने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय देते हुए 'नेशनल चैंपियन' का खिताब अपने नाम किया। वहीं लेवल जीरो 'बी' में हिमाक्ष शर्मा ने चैंपियन की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया, जबकि निधि शर्मा रनर-अप के पायदान पर रहीं। सफलता का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा; लेवल 1A में प्रतीक नामदेव चैंपियन घोषित किए गए, जबकि गौरांग सिंघल रनर-अप और हितिशा काबरा सेकंड रनर-अप के रूप में उभरीं। लेवल 1B में तन्मय गोयल ने चैंपियन का खिताब हासिल किया और अबेकस लेवल 3 में तनिष नामदेव ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए चैंपियन की ट्रॉफी जीती।

बौद्धिक स्पर्धा के साथ-साथ सांस्कृतिक मंच पर भी बारां की बेटी ने अपनी कला का जादू बिखेरा। तक्षशिला पब्लिक स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा भावना शर्मा ने राजस्थानी लोक नृत्य की ऐसी मनमोहक और ऊर्जावान प्रस्तुति दी कि निर्णायक मंडल ने उन्हें विजेता के सम्मान से नवाजा। लोक संस्कृति के प्रति भावना के इस समर्पण और कलात्मक निपुणता ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

विजेताओं की घर वापसी पर बारां में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर जैसे ही ये होनहार पहुंचे, परिजनों और शिक्षकों ने माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका भव्य स्वागत किया। संस्थान के संस्थापक ने गर्व के साथ साझा किया कि राजस्थान राज्य से कई जिलों के बच्चे शामिल हुए थे, लेकिन बारां के 34 बच्चों के दल ने 5 चैंपियन और 3 रनर-अप की ट्रॉफियां जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल इन बच्चों के कठिन परिश्रम का परिणाम है, बल्कि यह जिले में शिक्षा और कौशल विकास के बढ़ते स्तर को भी रेखांकित करती है। इन नन्हे विजेताओं की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

Pratahkal Bureau

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