बारां में सर्राफा व्यापार पर अस्तित्व का संकट: सोने-चांदी की 'आग' में झुलस रहे व्यापारी और कारीगर
बारां में सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी से सर्राफा बाजार ठप हो गया है। ललितमोहन खण्डेलवाल और अन्य व्यापारियों ने केंद्र सरकार से जीएसटी कटौती और एमसीएक्स पर नियंत्रण की मांग की है। जानिए कैसे बढ़ती कीमतों ने कारीगरों को पलायन और व्यापारियों को भुखमरी की कगार पर खड़ा कर दिया है।

बारां। देश और दुनिया के बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में आई अप्रत्याशित और 'जबरदस्ती' की तेजी ने बारां सहित पूरे देश के सर्राफा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। सोने और चांदी के आसमान छूते भावों ने न केवल आम आदमी की पहुंच से जेवरों को दूर कर दिया है, बल्कि इस उद्योग से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका पर भी गहरा प्रहार किया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि शोरूम से ग्राहक नदारद हैं और वर्कशॉप्स से कारीगर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं, जिससे सदियों पुराना यह पारंपरिक व्यवसाय अब अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।
बारां शहर के प्रमुख सर्राफा व्यवसायियों—ललितमोहन खण्डेलवाल, विनोद कुमार गर्ग, जयनारायण हल्दिया, जगदीश सिंघल, सुरेन्द्र सोनी, अशोक गर्ग, ओमप्रकाश पोरवाल, प्रमोद थुणगर, प्रमोद सोनी, महेश चौधरी, पवन बंसल, राजेन्द्र मंगल और अश्वनी बंसल—ने एकजुट होकर केंद्र सरकार से इस संकट में तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि एमसीएक्स (MCX) जैसे वायदा बाजारों पर प्रभावी नियंत्रण की कमी और सट्टेबाजी के कारण कीमतों में एकतरफा उछाल आ रहा है। जहां एक ओर निवेशकों के लिए एक वर्ष में सोने ने दोगुना और चांदी ने चार गुना रिटर्न देकर 'बल्ले-बल्ले' की स्थिति पैदा की है, वहीं वास्तविक आभूषण व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। 1 ग्राम सोने की कीमत 16,000 रुपये और एक जोड़ी सामान्य पायजेब की कीमत 32,500 रुपये तक पहुंच जाना ग्रामीण और मध्यम वर्गीय खरीदारों की क्रय क्षमता से कोसों दूर है।
व्यापारियों ने सरकार के समक्ष मांग रखी है कि इस व्यापार को 'ग्रहण' से बचाने के लिए जीएसटी की दर को तत्काल 3 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया जाए और आयात शुल्क में भारी कटौती की जाए। इसके साथ ही, बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए 'गोल्ड मोनोटाइजेशन स्कीम' को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि घरों में रखा निष्क्रिय सोना बाजार में आए और आयात पर निर्भरता कम हो सके। व्यापारियों ने हाल ही में आयात शुल्क बढ़ने की अफवाहों से चांदी की कीमतों में आई कृत्रिम तेजी की उच्च स्तरीय जांच की भी मांग की है। यदि सरकार ने किश्तों पर आभूषण बिक्री की अनुमति और नीतिगत सुधार जैसे कदम जल्द नहीं उठाए, तो बारां का यह गौरवशाली व्यापार इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
