बारां। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की हुंकार और राष्ट्र की आत्मा कहे जाने वाले राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर बारां जिला देशभक्ति के रंगों में सराबोर नजर आया। रविवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सूचना केन्द्र के हॉल में इतिहास और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने ‘वंदेमातरम-150’ प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ किया। भारतीय कला एवं संस्कृति विभाग तथा सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह प्रदर्शनी केवल चित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि आजादी के दीवानों के त्याग और समर्पण की एक जीवांत यात्रा है, जिसे अब आमजन के लिए विशेष रूप से विस्तारित किया गया है।

शुभारंभ के पश्चात जिला कलक्टर ने प्रदर्शनी का गहनता से अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित ऐतिहासिक दस्तावेजों व चित्रों के संयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की। प्रदर्शनी में बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा रचित इस कालजयी गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी निर्णायक भूमिका को बेहद मार्मिक ढंग से उकेरा गया है। कलक्टर तोमर ने जनसंपर्क कार्यालय की टीम के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए तत्काल प्रभाव से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने आमजन और विशेषकर युवा पीढ़ी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, पूर्व में निर्धारित दो दिवसीय प्रदर्शनी को अब 31 जनवरी तक खुला रखने के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि जिले का प्रत्येक नागरिक अपनी गौरवशाली विरासत से रूबरू हो सके।

प्रदर्शनी की प्रासंगिकता को समझते हुए जिला कलक्टर ने शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जिले के समस्त विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को इस प्रदर्शनी का अवलोकन अनिवार्य रूप से कराया जाए। उनका मानना है कि जब युवा पीढ़ी राष्ट्रगीत से जुड़ी गौरवपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को चित्रों और तथ्यों के माध्यम से देखेगी, तो उनके भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना और अधिक प्रगाढ़ होगी। प्रदर्शनी में दिखाया गया है कि कैसे 'वंदेमातरम' ने सम्पूर्ण भारत को एकता के सूत्र में पिरोया और कैसे यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जनआंदोलन का सबसे सशक्त हथियार बन गया था।

इस विशेष दीर्घा में न केवल राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिमचन्द्र चटर्जी का कृतित्व प्रदर्शित है, बल्कि उन अज्ञात और ज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का चित्रात्मक प्रस्तुतीकरण भी है जिन्होंने इस गीत को गाते हुए हंसते-हंसते लाठियां खाईं और फांसी के फंदे को चूमा। प्रदर्शनी में शामिल रोचक और तथ्यपरक विवरण दर्शकों को उस दौर में ले जाते हैं, जहां हर तरफ इंकलाब की गूंज थी। इस गरिमामयी अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी, सहायक निदेशक (जनसम्पर्क) योगेन्द्र शर्मा और एपीआरओ मोहन लाल सहित जिले के कई गणमान्य नागरिक और अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को इतिहास को संजोने वाला एक सार्थक कदम बताया।

Updated On
Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story