बारां में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत कृषक गोष्ठी आयोजित, ली शपथ
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में कृषि विभाग ने किसानों को सूक्ष्म सिंचाई अपनाने और जल सहेजने के लिए प्रेरित किया, 1800 से अधिक लोगों ने शपथ ली।

बारां के कृषि भवन स्थित आत्मा सभागार में आयोजित ब्लॉक स्तरीय कृषक गोष्ठी में विधायक ललित मीणा की अध्यक्षता में उपस्थित अधिकारियों और किसानों ने सामूहिक रूप से जल संरक्षण की राष्ट्रहितैषी शपथ ली।
बारां। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में बारां जिलेभर में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत व्यापक स्तर पर विभिन्न चेतनापरक गतिविधियों का आयोजन निरंतर जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को कृषि एवं उद्यान विभाग के तत्वावधान में स्प्रिंकलर, ड्रिप, फार्म पौण्ड तथा पाइप लाइन की स्वीकृतियां जारी की गईं। साथ ही प्राकृतिक, जैविक व प्री-सीजन खेती सहित सूक्ष्म सिंचाई पद्धति पर विशेष कार्यशाला एवं भव्य प्रदर्शनी का आयोजन संपन्न हुआ। विभाग द्वारा स्वीकृत कार्यों का गहन अवलोकन व लोकार्पण करने के साथ-साथ नवीन कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृतियां भी धड़ाधड़ जारी की गईं। 'हरियालो राजस्थान' के संकल्प को साकार करने के लिए पौधारोपण कार्यों की अग्रिम तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं, जिसके तहत कम्पोस्टिंग तकनीक का सघन प्रचार-प्रसार, लघु सिंचाई संयंत्रों की ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी, प्रगतिशील कृषकों से सीधा संवाद, किसान चौपाल, कृषि विज्ञान केन्द्रों पर संगोष्ठी, कृषि शिक्षा कार्यशाला का आयोजन तथा डिग्गियों की साफ-सफाई का कार्य बेहद मुस्तैदी से पूरा किया गया। जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से स्टेशन रोड अंता व अंता ब्लॉक के बालदड़ा में विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम एवं वृहद कृषक गोष्ठी का आयोजन कर अमूल्य जल को सहेजने का संदेश प्रसारित किया गया।
अभियान के अगले चरण में मंगलवार को जल संसाधन विभाग द्वारा जिले की नदियों, वृहद् एवं मध्यम बांधों, सरोवरों तथा नहरों इत्यादि पर विधि-विधान से पूजन अर्चन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नहरों एवं खालों की जल उपयोगिता संगम तथा स्थानीय कृषकों के सक्रिय सहयोग से साफ-सफाई व गाद निकालने का कार्य संपादित होगा। जल उपयोगिता संगमों द्वारा विभिन्न चेतना कार्यक्रमों, जल शक्ति अभियान के तहत 'कैच द रेन' और 'जल संचय जन भागीदारी' के अंतर्गत विशेष आयोजनों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें नये कार्यों का शिलान्यास व भूमि पूजन करने के साथ ही पूर्ण हो चुके विकास कार्यों का अवलोकन एवं लोकार्पण किया जाएगा।
कृषि विभाग द्वारा 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत सोमवार को प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर एवं समस्त सहायक कृषि अधिकारी मुख्यालयों पर एक दिवसीय किसान गोष्ठियों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में उपस्थित अन्नदाताओं से जल की एक-एक बूंद को सहेजने की भावपूर्ण अपील की गई तथा खेती-किसानी की क्रियाओं में पानी की बचत के लिए मिनी स्प्रिंकलर, पाइप लाइन व खेत तलाई आदि योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। पूरे जिले से कृषि विभाग के सजग कार्मिकों द्वारा वंदे गंगा ऐप पर 100 से अधिक कार्यक्रमों की डिजिटल प्रविष्टि की गई, जबकि जल संरक्षण के महापर्व पर उपस्थित 1800 से अधिक किसानों व कार्मिकों को सामूहिक रूप से जल सहेजने की राष्ट्रहितैषी शपथ दिलाई गई।
बारां ब्लॉक स्तरीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किशनगंज विधायक ललित मीणा की गरिमामयी अध्यक्षता में आत्मा सभागार, कृषि भवन में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि विभाग के सहायक निदेशक धनराज मीणा ने वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के मूल उद्देश्यों के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने भूमि की सेहत सुधारने हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए किसानों को विशेष रूप से प्रेरित किया और महंगे डीएपी उर्वरक के स्थान पर सस्ते व सुलभ एसएसपी एवं यूरिया का वैकल्पिक उपयोग करने की व्यावहारिक सलाह दी।
कार्यक्रम में उपस्थित संयुक्त निदेशक कृषि राजेश विजय ने कृषकों को रसायनों के अनियंत्रित उपयोग से बचते हुए संतुलित उर्वरकों के प्रयोग के साथ-साथ जैविक व प्राकृतिक खेती को पूरी तरह अपनाने तथा 'हरियालो राजस्थान' मिशन के अंतर्गत अपने खेतों व गांवों में अधिक से अधिक पौधारोपण करने की पुरजोर अपील की।
मुख्य अतिथि एवं विधायक ललित मीणा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में स्पष्ट किया कि देश के किसानों के लिए सबसे जरूरी खाद और पानी का जितना अधिक संतुलित तथा विवेकपूर्ण उपयोग किया जाएगा, हमारी खेती उतनी ही उन्नत, समृद्ध और बेहतर होती चली जाएगी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में लगातार बढ़ती जा रही उत्पादन लागत को नियंत्रित करने के लिए परंपरागत जैविक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की जरूरत पर विशेष बल दिया। विधायक मीणा ने किसानों को बहुमूल्य सुझाव देते हुए कहा कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन एवं अन्य नवीन नवाचारी गतिविधियों को अपनाएं, ताकि रासायनिक उर्वरकों एवं खतरनाक पेस्टिसाइड्स का उपयोग न्यूनतम हो सके। इससे न केवल मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरक क्षमता व सेहत में क्रांतिकारी सुधार होगा, बल्कि भविष्य में खेती एक अत्यधिक लाभदायक और आत्मनिर्भर व्यवसाय के रूप में स्थापित हो सकेगी।

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