बारां, राजेंद्र शर्मा। राजस्थान के बारां जिले में सोमवार को पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। आसमान में सुबह से ही काले बादलों की आवाजाही बनी रही, जो दोपहर होते-होते मध्यम दर्जे की आंधी, बिजली की गड़गड़ाहट और तेज बूंदाबांदी में तब्दील हो गई। मौसम विभाग द्वारा तीन दिन पूर्व जारी की गई चेतावनी के अनुरूप प्रशासन, नागरिक और किसान सतर्क तो थे, किंतु प्रकृति के इस अचानक रौद्र रूप ने कृषि उपज मंडी के व्यापारियों और काश्तकारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यद्यपि अभी तक जिले में किसी बड़े नुकसान की पुख्ता जानकारी प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन खेतों में कटी पड़ी गेहूं, लहसुन और चने की फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

व्यापारिक गतिविधियों की बात करें तो कृषि उपज मंडी के व्यापारी आनंद बंसल और दिनेश बंसल ने बताया कि वर्तमान में मंडी में प्रतिदिन लगभग पौने दो से दो लाख कट्टे गेहूं की आवक हो रही है। सोमवार की वर्षा को उन्होंने मामूली बताते हुए किसी विशेष नुकसान से इनकार किया है। वहीं लहसुन व्यापारी जगदीश बंसल ने स्पष्ट किया कि किसान और व्यापारी पूर्व से ही अलर्ट मोड पर थे और लहसुन की तुलाई प्रातः काल ही संपन्न होने के कारण उसे सुरक्षित स्थानों पर रखवा दिया गया था। व्यापार महासंघ के अध्यक्ष योगेश बाटा के अनुसार व्यापारियों ने मौसम की पूर्व सूचना के आधार पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए थे, जिसके चलते बाजारों में वर्षा का विशेष प्रभाव नहीं दिखा।

स्थानीय व्यापारियों भानू पोरवाल, राजेंद्र खींची, जितेंद्र अदलक्खा, संजय शर्मा, महेंद्र शर्मा कस्तूरी, हरिओम अग्रवाल और हेमंत गुप्ता ने भी फिलहाल किसी हानि की सूचना नहीं दी है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण साझा करते हुए राजेंद्र पंडित और दिलीप चौबे ने बताया कि आगामी एक-दो दिन मौसम का रुख ऐसा ही बना रह सकता है। अटरू क्षेत्र के हालात बताते हुए एडवोकेट सुरेश शर्मा ने जानकारी दी कि धूलभरी आंधी के कारण सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए प्रभावित हुई, जो बूंदाबांदी के बाद पुनः सामान्य हो गई। मौसम विभाग और स्थानीय विशेषज्ञों की मानें तो हवाओं के रुख के आधार पर ही आगामी दिनों का सटीक अनुमान संभव होगा, लेकिन फिलहाल बेमौसम की इस वर्षा ने कृषि प्रधान बारां जिले को चिंता में डाल दिया है।

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