यूपीआई भुगतान पर चार्ज की तैयारी से व्यापारियों में आक्रोश, व्यापार महासंघ ने जताया विरोध
बारां में यूपीआई भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में आक्रोश है। व्यापार महासंघ ने 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगाने की तैयारी का विरोध करते हुए सरकार से शुल्क नहीं लगाने की मांग की है।

तस्वीर में बारां व्यापार महासंघ के पदाधिकारी और व्यापारी नजर आ रहे हैं।
बारां में यूपीआई भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। व्यापार महासंघ के व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में यूपीआई से व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें दोबारा नकद लेनदेन की ओर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे व्यापारियों की परेशानी बढ़ने के साथ उनके कारोबार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
व्यापार महासंघ के अध्यक्ष योगेश कुमरा बाटा ने कहा कि सरकार ने पहले लोगों को यूपीआई से भुगतान करने की आदत डलवाई और अब यूपीआई पर शुल्क वसूलने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर किराना, मेडिकल, जनरल स्टोर, कपड़ा, रेडीमेड, खाद्य सामग्री, जूता-चप्पल, विद्युत उपकरण, रेस्तरां, भोजनालय, चाट-पतासी सहित अन्य फुटकर कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों पर पड़ने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने 16 सितंबर को अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इससे पहले व्यवस्था यह थी कि किसी भी यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता था।
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर कितना शुल्क लगाया जाएगा, इसका फैसला एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) को करना है। व्यापार महासंघ के अनुसार, यह दर 0.3 से 0.5 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। महासंघ ने कहा कि सरकार की ओर से अभी 0.4 प्रतिशत की अधिसूचना जारी की गई है। इसका मतलब है कि 5,000 रुपये का सामान खरीदने पर दुकानदार को 15 से 25 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। यह शुल्क ग्राहक को नहीं देना है।
व्यापारियों के अनुसार, यदि लोग एक-दूसरे से लेनदेन करते हैं तो उन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे लेनदेन की राशि कितनी भी हो। व्यापार महासंघ के व्यापारियों ने कहा कि इससे व्यापारियों के लिए व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है और अब हर व्यापारी नकद में व्यापार करने के लिए मजबूर हो रहा है।
व्यापार महासंघ के देवकीनंदन बंसल, ललित मोहन खंडेलवाल, विमल बंसल, वेद प्रकाश टक्कर, कलीम भाई बोहरा, सेन कुमार अदलक्खा, जयेश गालव, शेखर कुमरा, कमलेश गोयल, राकेश जैन, मनीष लश्करी, महासचिव कन्हैयालाल चित्तौड़ा, शंकर माहेश्वरी, नरेश नरवाना, उपाध्यक्ष नरेश खंडेलवाल, कमलेश जैन, संजय गुप्ता, संजय शर्मा, आनंद बंसल, भानु पोरवाल, महेंद्र शर्मा कस्तूरी, आसिफ भाई, मनोज बाठला, मनोज पिपलानी, पुनीत कुमरा, राहुल कुंमरा, मनीष गर्ग, जगदीश बंसल, महेंद्र गोयल, (बीएस) प्रवक्ता हर्षित जैन, पियूष गर्ग और नरेंद्र बोरीना सहित अन्य व्यापारियों ने यूपीआई पर शुल्क लगाने वाले कानून की कड़े शब्दों में निंदा की।
व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि यूपीआई पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाए। व्यापार महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि यूपीआई शुल्क वापस नहीं लिया गया तो व्यापारियों को भी सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
