बारां: श्रीमद् भागवत कथा के भव्य शंखनाद के साथ भक्ति रस में डूबी धर्मनगरी, संत गोविंद गिरी महाराज ने दिया संस्कारों का पाथेय
बारां में स्व. मुरलीधर साबू मेमोरियल ट्रस्ट और विष्णु साबू परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज के सानिध्य में निकली कलश यात्रा ने शहर को भक्तिमय कर दिया। महाराज ने प्रेस वार्ता में युवाओं के भटकाव, धर्मांतरण और मंदिरों में वीआईपी दर्शन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बेबाक विचार रखे और संस्कारों पर बल दिया। 11 जनवरी तक चलने वाले इस आध्यात्मिक उत्सव में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब।

राजस्थान की धर्मनगरी बारां में श्रद्धा और आध्यात्म का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जहाँ स्वर्गीय मुरलीधर साबू मेमोरियल ट्रस्ट एवं विष्णु साबू परिवार के सौजन्य से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। सोमवार को शहर के तेल फैक्ट्री स्थित श्रीराम जानकी मंदिर से शुभम रिसॉर्ट तक निकली भव्य कलश यात्रा ने समूचे वातावरण को मंगलमय कर दिया। सिर पर मंगल कलश धारण किए सैकड़ों महिलाओं और भजनों की धुन पर थिरकते श्रद्धालुओं के सैलाब ने शहर की सड़कों पर भक्ति का ऐसा रंग बिखेरा कि हर कोई इस धार्मिक उल्लास का साक्षी बनने को आतुर दिखा। इस आध्यात्मिक महोत्सव के मुख्य आकर्षण व्यास पीठाधीश्वर एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अयोध्या के कोषाध्यक्ष, प्रख्यात राष्ट्रीय संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज हैं, जिनके सानिध्य में यह आयोजन 11 जनवरी तक अनवरत चलेगा।
कलश यात्रा के पश्चात आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता में संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज ने समसामयिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर अपने विचार साझा करते हुए समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया। युवाओं में बढ़ते पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज का युवा भटक नहीं रहा है, अपितु उसे उचित मार्गदर्शन की प्रतीक्षा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति केवल उपभोग का साधन नहीं बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण कला है और भागवत कथा जैसे आयोजन युवाओं को उनकी जड़ों और संस्कारों से पुनः जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से अपनी भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का पुरजोर आह्वान किया।
देश में पैर पसारते धर्मांतरण के गंभीर मुद्दे पर महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म परिवर्तन अक्सर आस्था के बजाय प्रलोभन या मजबूरी का परिणाम होता है, जो सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देता है। उन्होंने इसका समाधान सेवा, समरसता और संवाद में बताते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और संस्कारों की पहुँच सुनिश्चित करना अनिवार्य है। वहीं, बड़े मंदिरों में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर प्रहार करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर की चौखट पर अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि इस व्यवस्था से प्राप्त धन का उपयोग जनहित और मंदिर विकास में हो तो इसे प्रबंधन की दृष्टि से देखा जा सकता है, परंतु धन के आधार पर श्रद्धालुओं में भेदभाव कदापि उचित नहीं है।
आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए मुख्य आयोजक एवं प्रमुख उद्योगपति विष्णु साबू, बजरंग साबू और सत्यप्रकाश साबू ने बताया कि 11 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिदिन कथा के साथ-साथ विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। भागवत कथा को राष्ट्रीय चेतना और मानवता का संदेश बताते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन बारां के जनमानस में सद्भाव और करुणा के बीज बोएगा। आगामी दिनों में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए व्यापक प्रबंध किए गए हैं, ताकि भक्ति की यह धारा निर्बाध रूप से बहती रहे।

Pratahkal Bureau
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