बारां। समाज की जड़ों को खोखला करने वाली बाल विवाह जैसी कुरीति के विरुद्ध अब युवा शक्ति ने मोर्चा खोल दिया है। जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के मार्गदर्शन में महिला अधिकारिता विभाग द्वारा राजकीय कन्या महाविद्यालय बारां में 'बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवमयी आयोजन का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज को इस अभिशाप से मुक्त कराना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया गया कि बाल विवाह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा है।

कार्यक्रम के दौरान पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केन्द्र की प्रबंधक अनिता नामा, विधि परामर्शी मोना जैन, विशेषज्ञ विनीता सेन और विशेषज्ञ लक्ष्मी राठौर ने छात्राओं को संबोधित करते हुए इस गंभीर विषय के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्राचार्य संजय मेहता, कार्यक्रम प्रभारी डॉ. सलोनी शर्मा और सहायक आचार्य डॉ. अर्पणा शर्मा की उपस्थिति में वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि कम उम्र में विवाह होने से न केवल बालिकाओं का शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध होता है, बल्कि वे पारिवारिक उत्तरदायित्वों के बोझ तले दबकर अपना भविष्य खो देती हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही विवाह करना परिवार की खुशहाली और सामाजिक उन्नति का आधार है।

इस आयोजन में कानूनी और नैतिक पक्ष को भी प्रखरता से रखा गया। विधि विशेषज्ञों ने चेतावनी भरे लहजे में बताया कि बाल विवाह में सम्मिलित होने वाले सभी पक्ष समान रूप से दोषी माने जाते हैं। चाहे वह कार्ड छापने वाला प्रिंटर हो, बैंड-बाजे वाले हों, हलवाई हो या फेरे करवाने वाले पंडित, कानून की नजर में सभी की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी तय है। छात्राओं को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, जैसे निशुल्क कंप्यूटर कोर्स और मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से या स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

कार्यक्रम के समापन सत्र में छात्राओं और विभाग के प्रतिनिधियों के बीच एक जीवंत संवाद हुआ। महाविद्यालय की बालिकाओं ने अपनी जिज्ञासाओं और शंकाओं को लेकर प्रश्न किए, जिनका समाधान केंद्र प्रबंधक और विशेषज्ञों द्वारा त्वरित रूप से किया गया। अंत में, महाविद्यालय की समस्त छात्राओं ने अपने-अपने गांवों को 'बाल विवाह मुक्त' बनाने का दृढ़ संकल्प लिया। कॉलेज प्रशासन ने महिला अधिकारिता विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता जताई, ताकि समाज की सोच में एक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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