बारां। धर्म और आस्था की नगरी बारां के श्रीराम मंदिर खाकी बाबा बगीचा परिसर में आयोजित सात दिवसीय 'श्रीराम कथा ज्ञान गंगा यज्ञ' का रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार, भव्य पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ समापन हो गया। भक्ति के इस महाकुंभ में जहां श्रोताओं ने भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात किया, वहीं अंतिम दिन यज्ञ की पावन आहुतियों से संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। श्रद्धा और समर्पण के इस संगम ने शहरवासियों को धर्म की उस अविरल धारा से जोड़ा, जिसने सामाजिक समरसता और लोक कल्याण का संदेश प्रसारित किया।

पूर्णाहुति के पावन अवसर पर सर्वप्रथम श्रीराम कथा ज्ञान गंगा यज्ञ समिति के मंत्री व पूर्व तहसीलदार लक्ष्मीनारायण प्रजापत एवं सदस्य ओम चक्रवर्ती ने श्रद्धापूर्वक व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरांत, विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ यज्ञ का अनुष्ठान प्रारंभ हुआ, जिसमें समिति के सभी सदस्यों ने देव शक्तियों को आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ को पूर्ण विधि-विधान से संपन्न कराने में मुख्य आचार्य स्वामी रामसुख दास महाराज, आचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा, सह आचार्य पंडित पुरुषोत्तम शर्मा माथनी और पंडित राकेश मंडोला की भूमिका अहम रही। वैदिक ऋचाओं के बीच जब 'पूर्णमद: पूर्णमिदम्' के स्वर गूंजे, तो पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति के पश्चात विशाल प्रसाद वितरण (भंडारा) कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस व्यवस्था को सुचारू बनाने में श्याम शर्मा चश्मा वाले, ओम गौतम बढ़वाले, गोपीकृष्ण शर्मा पीटीआई, शंभूदयाल गोयल और नंदा शर्मा की सेवाएं अत्यंत उल्लेखनीय रहीं। आयोजन की सफलता के पीछे निस्वार्थ भाव से की गई 'कारसेवा' का भी बड़ा योगदान रहा, जिसमें घनश्याम सुमन, अशोक नामदेव, राजू कालरा जैसे स्वयंसेवकों और मातृशक्ति में रंजिता नाम, हेमा वैष्णव तथा सलोनी अरोड़ा ने अपनी प्रशंसनीय सेवाओं से समर्पण की मिसाल पेश की।

कार्यक्रम के समापन पर समिति के संरक्षक सीताराम शर्मा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोजन की भव्यता जनसहयोग का परिणाम है। समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व जिला प्रमुख नन्दलाल सुमन ने कथा की निर्विघ्न संपन्नता पर संतोष व्यक्त करते हुए बारां शहर की धर्मप्रेमी जनता का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में एकता और शांति का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

Pratahkal Bureau

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