बारां: “ऐसे जनप्रतिनिधि बहुत आते हैं…” नगर परिषद अधिकारी के गैर-जिम्मेदाराना बोल से इंदिरा विहार वासियों में भारी आक्रोश
बारां की इंदिरा विहार कॉलोनी में 15 साल से सड़क न बनने पर नगर परिषद अधिकारी ने विधायक के आदेश का मजाक उड़ाते हुए कहा, "ऐसे जनप्रतिनिधि बहुत आते हैं।" इस अपमानजनक बयान और प्रशासनिक उदासीनता से कॉलोनीवासियों में भारी आक्रोश है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें कि कैसे विकास के दावों के बीच जनता की जायज मांग को अनसुना किया जा रहा है।

राजस्थान के बारां जिले में प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोकतंत्र में जनता और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों की गरिमा पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जिला कलेक्टर कार्यालय और जिला न्यायालय जैसी महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित इंदिरा विहार कॉलोनी के निवासी पिछले 15 वर्षों से एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। लेकिन जब अपनी इसी जायज मांग को लेकर वे नगर परिषद पहुंचे, तो वहां तैनात एक अधिकारी के उपहासपूर्ण बयान ने उन्हें हतप्रभ कर दिया। सड़क निर्माण का भरोसा दिलाने के बजाय अधिकारी ने चुटकी लेते हुए कहा— “ऐसे जनप्रतिनिधि बहुत आते हैं।”
इंदिरा विहार कॉलोनी का रूपांतरण करीब वर्ष 2013-14 में हुआ था, लेकिन विडंबना यह है कि डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी यहां की सड़कें बदहाली के आंसू रो रही हैं। कॉलोनीवासी अपनी समस्या को लेकर अब तक अनगिनत बार जिला कलेक्टरों और नगर परिषद के आला अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं। लिखित ज्ञापनों और मौखिक प्रार्थना पत्रों का अंबार लग चुका है, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा। व्यवस्था से निराश होकर निवासियों ने स्थानीय विधायक राधेश्याम बेरवा से गुहार लगाई। विधायक ने सक्रियता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया, परंतु धरातल पर पत्थर की एक ईंट तक नहीं हिली।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब हाल ही में राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित 'उपलब्धि रथ यात्रा' के दौरान अंबेडकर सर्किल पर कॉलोनीवासियों ने पुनः विधायक राधेश्याम बेरवा को घेरा। विधायक ने तत्काल प्रभाव से नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त को फोन लगाया और सड़क कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। आयुक्त ने भी भरोसा दिलाया कि वे एक-दो दिन में काम शुरू करवा देंगे। इसी आश्वासन की डोर थामकर जब कॉलोनी का प्रतिनिधिमंडल नगर परिषद पहुंचा, तो उन्हें जेईएन के पास भेज दिया गया। शुरुआती तत्परता दिखाते हुए जेईएन ने नाप-जोख के लिए टीम भी भेजी, लेकिन आठ दिन बीतने के बाद भी जब निर्माण की सुगबुगाहट नहीं हुई, तो कॉलोनीवासी दोबारा जवाब मांगने पहुंचे।
जब निवासियों ने अधिकारी को याद दिलाया कि स्वयं विधायक महोदय ने इस कार्य के लिए निर्देशित किया है, तब अधिकारी ने बेहद हल्के अंदाज में जनप्रतिनिधि की महत्ता को नकारते हुए उक्त विवादित टिप्पणी कर दी। हालांकि बाद में इसे 'मजाक' कहकर टालने की कोशिश की गई, लेकिन इस बयान ने कॉलोनीवासियों के स्वाभिमान को गहरी चोट पहुंचाई है। इस पूरे प्रकरण पर जब नगर परिषद के जेईएन मानसिंह मीणा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके कार्यालय में ऐसी कोई बात नहीं हुई और उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि कॉलोनीवासी किससे मिले थे।
आज इंदिरा विहार के नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सवाल केवल एक सड़क के निर्माण का नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक मर्यादा का भी है जिसे एक सरकारी मुलाजिम ने सरेआम ठेंगा दिखाया। फिलहाल प्रशासनिक उदासीनता और इस अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ कॉलोनीवासियों में जबरदस्त रोष व्याप्त है, जो आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
