बारां शहर के श्रीजी चौक स्थित ऐतिहासिक एवं आराध्य देव भगवान कल्याण राय जी के श्रीजी मंदिर के गर्भ गृह शिखर, गोलाकार परिक्रमा मार्ग, क्षतिग्रस्त दीवारों और बाहर स्थित जर्जर दुकानों को लेकर स्थानीय नागरिकों एवं मंदिर दर्शनार्थियों में गहरा आक्रोश और चिंता है। इस गंभीर समस्या को लेकर मंदिर दर्शनार्थियों और शहरवासियों ने जिला कलेक्टर, बारां को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया कि मंदिर के अंदर क्षतिग्रस्त शिखर और गोलाकार परिक्रमा मार्ग अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। वहीं मंदिर के मुख्य द्वार के पास स्थित जर्जर दुकानें भी कभी भी भरभरा कर गिर सकती हैं।

ज्ञापन के अनुसार श्रीजी मंदिर के सामने दाएं और बाएं दोनों तरफ देवस्थान विभाग की 7 दुकानें स्थित हैं, जो अंदर की ओर करीब 22-22 फीट तक हैं। ये दुकानें बेहद जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं और इनके ऊपर पीपल एवं बरगद के पेड़ तक उग आए हैं। दुकानों की स्थिति इतनी खराब है कि इनके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। इससे वहां से गुजरने वाले दर्शनार्थियों की जान को लगातार खतरा बना हुआ है।

श्रीजी चौक से चौमुखा बाजार शहर का प्रमुख मार्ग होने के कारण अत्यंत व्यस्त रहता है। यह मार्ग बारां शहर का प्राचीन मुख्य मार्ग है और इसके आसपास पुरानी घनी बस्तियां हैं। इसी मार्ग से आगामी डोल एकादशी, कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी, नवरात्र, गणगौर, जगन्नाथ रथ यात्रा और दीपावली सहित कई प्रमुख त्योहारों पर जुलूस एवं शोभायात्राएं निकलती हैं। ऐसे में जर्जर दुकानों के कारण किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि इस गंभीर खतरे से नगर परिषद, जिला प्रशासन और देवस्थान विभाग के अधिकारी भली-भांति परिचित हैं। इसके बावजूद सरकार, विधायक, सांसद, देवस्थान मंत्री एवं प्रभारी मंत्री की उदासीनता के चलते नागरिकों में भारी रोष है।

ज्ञात रहे कि इस विषय को लेकर पूर्व में भी श्रीजी भक्त मंडल के पदाधिकारियों राजेंद्र शर्मा, भानु पोरवाल, आनंद बंसल, दिनेश बंसल, संजय शर्मा, दिलीप चौबे, नरेश सोमानी, एडवोकेट सुरेश शर्मा, हेमंत गुप्ता, महेंद्र शर्मा कस्तूरी, राजेंद्र खींची, दीपक कालरा और महेश बाबा इत्यादि ने जिला प्रशासन एवं देवस्थान विभाग को ज्ञापन के माध्यम से आगाह किया था। इसके बावजूद दोनों विभागों की उदासीनता के चलते आज तक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई और न ही मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए आवंटित बजट का उपयोग किया गया।

स्थानीय निवासियों एवं व्यापारियों ने मांग की है कि जन-धन की बड़ी हानि को टालने के लिए परिक्रमा मार्ग के पीछे की क्षतिग्रस्त दीवार की तुरंत मरम्मत कराई जाए। साथ ही देवस्थान विभाग की इन जर्जर दुकानों, दाएं और बाएं 3$4 दुकानें, को तत्काल प्रभाव से गिराया जाए। वर्तमान में इन दुकानों की लंबाई करीब 22 फीट और चौड़ाई 9-10 फीट है, जिसे घटाकर लगभग 10 फीट किया जाए। इससे भविष्य में शोभायात्रा, जुलूस, झांकियों और दर्शनार्थियों के आवागमन के दौरान जाम की स्थिति नहीं बनेगी और मंदिर का भव्य स्वरूप भी नजर आ सकेगा।

ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री, शासन सचिव, देवस्थान विभाग, स्थानीय सांसद, झालावाड़-बारां, विधायक, बारां-अटरू और आयुक्त, नगर परिषद बारां को भी सूचनार्थ प्रतिलिपि भेजी गई है।

ज्ञापन देने वालों में महेश पंचोली, महेंद्र अग्रवाल, प्रवीन चौरसिया, सुरेंद्र सेन (टुंडा), नकुल सोनी, शेखबहादुर करवा, विक्रमादित्य, ललित रंजन, महेंद्र जग्रवाल, सुरेंद्र, पवन शर्मा, दीपक शर्मा, पवन सेन, दिलीप त्यागी, प्रवीण चौरसिया, नकुल सोनी, हिमांशु सेन, महेश कुमार, सुनील सांखला, श्यामसुंदर सहित कई अन्य नागरिक एवं दर्शनार्थी मौजूद रहे।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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