बारां से शेरगढ़ तक विरासत की खोज: ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की नई पहल
बारां से शेरगढ़ तक आयोजित विरासत यात्रा में इतिहासकारों और धरोहर प्रेमियों ने शेरगढ़ फोर्ट के ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की जरूरत और पर्यटन विकास की संभावनाओं पर मंथन किया। आखिर क्यों बढ़ रही है इस प्राचीन दुर्ग को नई पहचान दिलाने की मांग?

बारां से शेरगढ़ विरासत यात्रा के दौरान आयोजित संगोष्ठी में इतिहास प्रेमी राकेश शर्मा, मुख्य अतिथि बृजेश विजयवर्गीय और अन्य विशेषज्ञ धरोहर संरक्षण पर चर्चा करते हुए।
जिले की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों को नई पहचान दिलाने तथा उन्हें पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने के उद्देश्य से इंटेक बारां चैप्टर के तत्वावधान में “बारां से शेरगढ़” विरासत यात्रा का आयोजन किया गया। इस विशेष यात्रा में इतिहासकारों, पुरातत्व विशेषज्ञों, धरोहर प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विरासत यात्रा रविवार सुबह 8:30 बजे झालावाड़ रोड स्थित एक निजी रिसॉर्ट से शेरगढ़ के लिए रवाना हुई। यात्रा को भारत तिब्बत सहयोग मंच के प्रांतीय प्रचार प्रमुख राजेंद्र शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शेरगढ़ पहुंचने के बाद प्रतिभागियों ने वहां स्थित ऐतिहासिक स्थलों और पुरातात्विक अवशेषों का अवलोकन कर क्षेत्र की समृद्ध विरासत को करीब से समझने का प्रयास किया।
यात्रा के दौरान इंटेक बारां चैप्टर द्वारा एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता इतिहास प्रेमी राकेश शर्मा ने की। कार्यक्रम में कोटा इंटेक सदस्य बृजेश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संगोष्ठी में वक्ताओं ने शेरगढ़ फोर्ट के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामरिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इतिहासकार राकेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शेरगढ़ फोर्ट राजस्थान के बारां जिले में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक दुर्ग है, जिसका निर्माण हाड़ा चौहान शासकों के काल में माना जाता है। उन्होंने बताया कि मालवा और हाड़ौती के बीच आने वाले महत्वपूर्ण मार्गों की निगरानी के लिए यह किला सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने इसके संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मुख्य अतिथि बृजेश विजयवर्गीय ने कहा कि ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार शेरगढ़ फोर्ट का उपयोग सैन्य चौकी और प्रशासनिक केंद्र के रूप में किया जाता था। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यह दुर्ग प्राकृतिक रूप से सुरक्षित था। किले की मजबूत प्राचीरें, बुर्ज, विशाल प्रवेश द्वार और जल-संचयन की व्यवस्थाएं उस समय की उन्नत स्थापत्य एवं रक्षा तकनीक का परिचय देती हैं।
विशिष्ट अतिथि राजेंद्र शर्मा ने कहा कि मुगल-राजपूत काल में यह किला अनेक संघर्षों का साक्षी रहा। बाद में यह हाड़ौती क्षेत्र की रियासतों के अधीन रहा। वर्तमान में किला आंशिक रूप से खंडहर अवस्था में है, फिर भी यह राजस्थान की वीरता, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है।
इंटेक सदस्य एवं होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान, बारां के अध्यक्ष हरिओम अग्रवाल ने कहा कि शेरगढ़ फोर्ट आज इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है तथा यह बारां जिले की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस स्थल को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रयासों की आवश्यकता है।
संगोष्ठी में शेरगढ़ के सरपंच शकूर बेग और स्थानीय धरोहर संरक्षण से जुड़े नरेंद्र सिंह सोलंकी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शेरगढ़ फोर्ट और यहां मौजूद पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल को राज्य स्तर पर व्यापक पहचान मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र घोषित होने के बाद यहां मूलभूत पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में परवेज मिर्जा, दिलीप कुमार, मुकेश केवट सहित कई धरोहर प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। संगोष्ठी के अंत में मोहम्मद अशफाक राईन ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन कन्वीनर जितेन्द्र शर्मा पम्मी ने किया।
यह विरासत यात्रा केवल एक ऐतिहासिक भ्रमण नहीं रही, बल्कि शेरगढ़ फोर्ट जैसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पर्यटन विकास की दिशा में सामूहिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण प्रयास बनकर सामने आई।

Pratahkal Bureau
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