शाहबाद घाटी में निजी हाइड्रो पावर परियोजना को लेकर बढ़ा विवाद, किसानों और वन संरक्षण को लेकर संघर्ष तेज
बारां की शाहबाद घाटी में 407.87 हेक्टेयर वन भूमि पर प्रस्तावित निजी हाइड्रो पावर परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। किसानों के आरोप, पर्यावरणीय चिंताएं और संघर्ष समिति की चेतावनी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

राजस्थान के बारां जिले की शाहबाद तहसील में प्रस्तावित निजी हाइड्रो पावर परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शाहबाद घाटी की 407.87 हेक्टेयर वन भूमि को हैदराबाद स्थित ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की हाइड्रो पावर परियोजना के लिए चिन्हित किए जाने के बाद स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध तेज कर दिया है। परियोजना को लेकर क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव, वन संपदा के संरक्षण और किसानों के भूमि अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रस्तावित परियोजना के चलते बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आशंका है, जिससे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना क्षेत्र से सटी कृषि भूमि के संबंध में कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किसानों पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। किसानों ने इस संबंध में भय और असंतोष का वातावरण होने का दावा किया है।
इसी क्रम में पीड़ित किसान मदन जाटव पुत्र ओंकार लाल तथा राधे पुत्र गणेश लाल ने पुलिस अधीक्षक बारां को लिखित परिवाद सौंपकर कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। परिवाद में किसानों ने आरोप लगाया है कि उन्हें जमीन संबंधी मामलों में दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने भी इस मुद्दे को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। समिति के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने कहा कि घाटी क्षेत्र की वन संपदा और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या किसानों पर दबाव की स्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने अथवा किसानों के अधिकारों का हनन करने का प्रयास हुआ तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने भी परियोजना से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह केवल भूमि का नहीं बल्कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का विषय है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा परियोजना पर पुनर्विचार की मांग की।
संघर्ष समिति के युवा नेता गब्बर सिंह यदुवंशी ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना को लेकर युवाओं और ग्रामीणों में व्यापक चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों पर भूमि हस्तांतरण के लिए दबाव बनाया जा रहा है, जिसकी जांच आवश्यक है। वहीं समिति के संयोजक भानु गुप्ता ने कहा कि शाहबाद घाटी क्षेत्र की पारिस्थितिकी और वन संपदा का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
समिति ने परियोजना पर तत्काल रोक लगाने, किसानों पर दबाव और धमकी देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने, प्रभावित किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।
शाहबाद घाटी में प्रस्तावित इस परियोजना को लेकर अब विवाद प्रशासनिक और कानूनी स्तर तक पहुंच चुका है। किसानों के आरोप, पर्यावरण संरक्षण की चिंताएं और संघर्ष समिति की चेतावनियों के बीच यह मामला क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

Pratahkal Bureau
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