बारां। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी एण्ड हाईपावर कमेटी) की ओर से अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण, सीमांकन और पारिस्थितिकीय संतुलन के संदर्भ में अजमेर में जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के संरक्षक अधिवक्ता प्रशांत पाटनी ने समिति की अध्यक्ष एवं महानिदेशक कंचन देवी के समक्ष शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व एवं अरावली विस्तार से जुड़े तथ्यात्मक ज्ञापन के साथ विस्तृत पक्ष रखा।

अधिवक्ता प्रशांत पाटनी ने समिति द्वारा निर्धारित छह मुख्य संदर्भ बिंदुओं के आलेख के तहत बारां जिले की पर्वत श्रृंखला को अरावली पर्वत श्रृंखला में शामिल किए जाने की मांग प्रमुखता से रखी। उन्होंने बारां में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अरावली की बारां-शाहबाद पर्वत श्रृंखला पर विनाशकारी खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने बताया कि शाहबाद घाटी में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद) द्वारा प्रस्तावित विशाल पंप स्टोरेज पावर प्लांट के कारण लगभग 5 लाख फलदार और औषधीय वृक्षों की कटाई का अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है। संघर्ष समिति ने इस परियोजना को तत्काल निरस्त करने और सम्पूर्ण शाहबाद पर्वतीय घाटी को अरावली के तहत कानूनन नो-गो एरिया घोषित करने की मांग की है।

प्रशांत पाटनी ने एचपीसी कमेटी के समक्ष प्रस्तुत छह प्रमुख संदर्भ बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की सितंबर 2025 की आधिकारिक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार पांच राज्यों में अरावली पर्वतमाला के तहत कुल 63 जिले आते हैं। इसके विपरीत, पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अक्टूबर 2025 में प्रस्तुत शपथ पत्र में केवल 37 जिलों को अरावली क्षेत्र दर्शाया गया है। इससे 26 महत्वपूर्ण जिले अरावली सुरक्षा दायरे से बाहर हो गए हैं। इनमें पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के बारां, कोटा, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर आदि प्रमुख जिले शामिल हैं। समिति ने इन सभी 26 जिलों को पुनः अरावली सूची में शामिल करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि शाहबाद क्षेत्र हाड़ौती पठार पर स्थित अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र है और विंध्यन तथा अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के दुर्लभ मिलन स्थल के रूप में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसे अरावली सुरक्षा दायरे से बाहर रखना क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा।

शाहबाद की अरावली पहाड़ियां पार्वती, कुन्नू और परवन जैसी प्रमुख नदियों का मुख्य जलग्रहण क्षेत्र हैं। यह पर्वत श्रृंखला भूजल स्तर को रिचार्ज करने और पूरे शुष्क-अर्धशुष्क अंचल को जल सुरक्षा प्रदान करने का मुख्य स्रोत है। समिति के अनुसार यहां किसी भी प्रकार की औद्योगिक छेड़छाड़ से पूरे चंबल बेसिन के भूगर्भ जल चक्र को भारी क्षति पहुंचेगी।

प्रशांत पाटनी ने कहा कि शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व वन्यजीवों का समृद्ध प्राकृतिक वास है। यहां तेंदुए, भालू और आईयूसीएन की रेड लिस्ट में शामिल अति-दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों की नेस्टिंग साइट मौजूद है। साथ ही, पूरे विश्व में पाई जाने वाली 450 औषधीय पौधों की प्रजातियों में से 332 प्रजातियां इसी जंगल में विद्यमान हैं। इसे अरावली घोषित किए जाने पर ही इस अनमोल जैव विविधता को राष्ट्रीय स्तर का कानूनी कवच मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि शाहबाद की चट्टानी संरचना और भौगोलिक बनावट वैज्ञानिक रूप से प्राचीन अरावली पर्वतमालाओं का ही निरंतर विस्तार है। एफएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट इसकी भूवैज्ञानिक निरंतरता की पुष्टि करती है। इसे अरावली क्षेत्र घोषित होते ही कानूनी रूप से नो-गो एरिया का दर्जा मिलेगा, जिससे अवैध खनन और व्यावसायिक दोहन पर पूर्ण रोक लग सकेगी।

शाहबाद क्षेत्र आदिम जनजाति सहरिया का मूल प्राकृतिक निवास स्थान भी है। स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों की आजीविका पूरी तरह वनों, जल स्रोतों और वनोपज पर निर्भर है। संघर्ष समिति ने कहा कि विनाशकारी औद्योगिक परियोजनाओं से उनकी आजीविका छिन जाएगी और सामाजिक-सांस्कृतिक ताना-बाना पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

समिति की ओर से मांग की गई कि एफएसआई की सितंबर 2025 की रिपोर्ट को पूर्ण रूप से स्वीकार करते हुए बारां जिले सहित सभी 63 जिलों को आधिकारिक अरावली क्षेत्र घोषित किया जाए। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित गोवर्धन पर्वत/ब्रजभूमि को भी इसमें शामिल करने की मांग की गई।

समिति ने अरावली के संरक्षण संबंधी नियमों के अनुसार ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित पंप स्टोरेज प्लांट को अविलंब रद्द कर 5 लाख वृक्षों को कटने से बचाने की मांग की। साथ ही जनसुनवाई की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग करते हुए कहा गया कि मात्र 21 दिन की अवधि और गूगल फॉर्म/ईमेल आधारित जटिल डिजिटल प्रक्रिया के स्थान पर स्थानीय स्तर पर शाहबाद/बारां में पारदर्शी, ऑफलाइन और जन-सुलभ जनसुनवाई की व्यवस्था की जाए।

शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने समिति अध्यक्ष से इन न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए पर्यावरण और स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करने का विनम्र अनुरोध किया है। जनसुनवाई में उठाई गई मांगों का केंद्र शाहबाद पर्वतीय क्षेत्र को अरावली के संरक्षण दायरे में शामिल करना और प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट से संभावित पर्यावरणीय क्षति को रोकना रहा।

Pratahkal Newsroom

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