बारां। अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ताओं द्वारा श्रीराम स्टेडियम, बारां से शाहबाद तक एक विशाल जनजागृति विरासत यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण यात्रा में राजस्थान प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

हाइड्रो पावर प्लांट का विरोध और पदयात्रा का मार्ग

इस जनजागृति यात्रा के दौरान समस्त पर्यावरण कार्यकर्ता शाहबाद जंगल के लाखों बेशकीमती वृक्षों की कटाई तथा वहां प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट परियोजना के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आंदोलन से जुड़े ये सभी लोग बारां से रवाना होकर किशनगंज, भंवरगढ़, केलवाड़ा, समरानिया, मुंडियर और अंत में शाहबाद में जुलूस और रैली के रूप में जंगल बचाने एवं प्लांट निरस्त करने की मांग करेंगे। यात्रा के शाहबाद पहुँचने पर प्रतिनिधिमंडल द्वारा एडीएम शाहबाद जब्बर सिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें जंगल कटाई रोकने एवं हाइड्रो पावर प्लांट की स्वीकृति निरस्त करने की माँग की जाएगी।

प्रबुद्ध पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी

इस विशाल जनआंदोलन में देश-प्रदेश के प्रमुख चेहरे शामिल हो रहे हैं, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोबिन सिंह (फाउंडर ग्रीन इंडिया मूवमेंट, उत्तरप्रदेश), बाबूलाल जाजू (अध्यक्ष, पीपुल्स फॉर एनिमल्स भीलवाड़ा), जयराम पाण्डेय पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी (अध्यक्ष, रिटायर्ड फॉरेस्ट ऑफिसर एंड एम्प्लाइज यूनियन, जयपुर), कविता श्रीवास्तव (प्रेसिडेंट पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज जयपुर), विठ्ठल सनाड्य (संयोजक, पीपुल्स फॉर एनिमल्स, बूंदी), बृजेश विजयवर्गीय (समन्वयक, चम्बल संसद, कोटा), वरदान सिंह हाडा (अध्यक्ष, जागो किसान, झालावाड़), डॉ सुधीर गुप्ता (अध्यक्ष, हमलोग संस्था, कोटा), दिलीप शाह (अध्यक्ष जिला प्रेस क्लब, बारां), श्याम मनोहर हरित (संभागीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार, पर्यावरण सुरक्षा एवं भ्रष्टाचार निवारण संगठन, कोटा), दिनेश राय द्विवेदी (सामाजिक कार्यकर्ता एवं एड, कोटा), डॉ महेंद्र नेह (विकल्प जन साहित्य समिति, कोटा), प्रशांत पाटनी (पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता एवं संरक्षक शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां), यज्ञदत्त हाडा (अखिल भारतीय गायत्री साधना आश्रम, कोटा) सहित हाड़ौती संभाग के अनेक गणमान्य नागरिक भाग लेंगे।

पारिस्थितिक तंत्र और भावी पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल

आयोजकों ने अपनी चिंताओं को साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि "शाहबाद जंगल केवल स्थानीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे हाड़ौती अंचल के पर्यावरणीय संतुलन, जलस्रोतों, जैव विविधता और भावी पीढ़ियों के जीवन से जुड़ा हुआ है।" उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि "जंगल की कटाई किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।"

Pratahkal Bureau

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