बारां: किशनगंज-शाहाबाद को टीएसपी क्षेत्र घोषित करने के विरोध में सहरिया समाज का ज्ञापन
सहरिया समाज ने 25 प्रतिशत आरक्षण खत्म होने के डर से किशनगंज और शाहाबाद को टीएसपी क्षेत्र बनाने के प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की।

बारां जिला मुख्यालय पर सहरिया चौरासी विकास समिति के पदाधिकारियों द्वारा किशनगंज-शाहाबाद को टीएसपी क्षेत्र घोषित करने के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए।
बारां। सहरिया चौरासी विकास समिति एवं समस्त सहरिया समाज जिला बारां की ओर से हजारी लाल सहरिया अध्यक्ष सहरिया समाज चौरासी, रामदयाल सहरिया अध्यक्ष कर्मचारी संगठन किशनगंज शाहाबाद के नेतृत्व में किशनगंज शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र को टीएसपी क्षेत्र घोषित करने के विरोध में जिला कलक्टर को राजस्थान सरकार में जनजाति मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
सहरिया आदिम जनजाति की विशिष्ट भौगोलिक और आर्थिक स्थिति
ज्ञापन में बताया कि सहरिया आदिम जनजाति, राजस्थान राज्य के जिला बारां की किशनगंज व शाहबाद तहसीलों में आदिकाल से बाहुल्यता के साथ निवासरत है, एवं अन्य तहसीलों में भी बिखराव के साथ निवास करती है। सहरिया आदिम जनजाति आदिकाल से ही अपने जीवन यापन के लिए वनोपज एवं खेतीहर मजदूरी पर निर्भर है, तथा आर्थिक दृष्टि से बेहद गरीब है। सहरिया आदिम जनजाति समुदाय आर्थिक सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े होने के कारण अन्य जातियों के साथ कदमताल मिलाने में असफल रही है। जिसको मद्देनजर रख राज्य सरकार एवं भारत सरकार ने सहरिया जनजाति के पृथक् से विकास की रूपरेखा तैयार की जो सहरिया विकास परियोजना के रूप में क्रियान्वित है। किशनगंज व शाहबाद तहसीलों के लिए अलग से अतिरिक्त जिला कलक्टर एवं सहरिया विकास परियोजना अधिकारी शाहबाद की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की गई है।
आरक्षण का इतिहास और विकास की वर्तमान डगर
वर्ष 1999 तक सहरिया विकास परियोजना के द्वारा, सहरिया आदिम जनजाति के विकास में अपेक्षित परिणाम नही आने पर राज्य सरकार को सहरिया आदिम जनजाति को विशेष सुविधा के रूप मे सरकारी नोकरियों मे पृथक् से आरक्षण दिए जाने की आवश्यकता महसूस हुई। बारां जिले की किशनगंज शाहबाद तहसीलों में निवासरत सहरिया आदिम जनजाति के योग्य युवक युवतियों के लिए राज्य सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी राजकीय सेवाओं ( वेतन 1 - 6 ) में सीधी भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की गई। वर्ष 2013 में 21 मई 2013 को उक्त आदेश सम्पूर्ण बारां जिले की सभी तहसीलों की सहरिया आदिम जनजाति के लोगों के लिए लागू कर दिया गया। जिससे आज सुखद परिणाम के रूप में सहरिया आदिम जनजाति से कुछ संख्या में ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी, कॉनिस्टेबल, तृतीय श्रेणी अध्यापक, कृषि पर्यवेक्षक, ए.एन.एम., आदि सरकारी सेवा में नियुक्त हुए। जिससे सहरिया आदिम जनजाति के लोगों ने विकास की राह पर कदम रखा। परन्तु शेष सहरिया समाज जो सरकारी सेवा से वंचित है, उसकी आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, स्थिति जस की तस बनी हुई है।
टीएसपी क्षेत्र घोषित होने से सहरिया समाज के अस्तित्व पर संकट
विगत कुछ वर्षों से किशनगंज व शाहबाद क्षेत्र में गैर आदिवासी लोगों द्वारा टी.एस.पी. संघर्ष समिति के माध्यम से किशनगंज व शाहबाद क्षैत्र को टीएसपी क्षेत्र घोषित किए जाने की माँग लगातार की जा रही है। साथ ही वर्तमान विधायक सदस्य ललित मीना द्वारा सहरिया बाहुल्य क्षेत्र बारां जिले की किशनगंज शाहाबाद तहसीलों को टीएसपी क्षैत्र घोषित कराने हेतु प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भिजवाने की मांग की है। यदि यह क्षैत्र टीएसपी क्षेत्र घोषित होता है तो सहरिया आदिम जनजाति की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, स्थिति पुनः उस स्तर पर आ जाएगी जो 25 वर्ष पूर्व 25 प्रतिशत आरक्षण लागू किए जाने से पहले थी।
समाज के पदाधिकारियों बताया कि "टीएसपी क्षेत्र घोषित होने पर सहरिया आदिम जनजाति को राज्य सेवाओं को छोड़कर शेष राजकीय सेवाओं में खण्ड स्तर, जिला स्तर, एवं राज्य स्तर पर मिल रहा 25 प्रतिशत आरक्षण समाप्त हो जाएगा, टीएसपी क्षेत्र घोषित होने पर इस क्षेत्र में समस्त अनुसूचित जनजातियों (भील, मीणा, सहरिया आदि) को 45 प्रतिशत आरक्षण देय होगा। जिससे पूर्व से आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक रूप से पिछड़ी सहरिया आदिम जनजाति के लोग अन्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे, राज्य के समस्त टीएसपी क्षेत्रों के निवासित व्यक्तियों की इस सहरिया बाहुल्य क्षेत्र में खुली प्रतिस्पर्धा होगी, जिसमें सहरिया आदिम जनजाति का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि अन्य जाति व जनजातियों के व्यक्ति सहरिया आदिम जनजाति की अपेक्षा सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक क्षेत्र में अग्रणी है, अगर टीएसपी क्षेत्र घोषित हो जाता है तो, सहरिया आदिम जनजाति के लोगों पर अन्याय, शोषण व अत्याचार का ग्राफ बढ़ जाएगा, जो क्षैत्र पूर्व से टीएसपी क्षेत्र (जैसे बांसवाड़ा, डूंगरपुर सिरोही आदि) घोषित है, वहाँ पर सम्पूर्ण आरक्षित वर्ग एक ही जाति समुदाय से है, जिसकी आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक एवं राजनैतिक स्थिति कमोबेश एक समान है। जबकि इस क्षैत्र में सहरिया आदिम जनजाति की स्थिति अन्य जातियों की तुलना में बेहद पिछड़ी है।"
ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मुख्य मांगें
प्रतिस्पर्धा में और पिछड़ने की सम्भावना है, राजस्थान राज्य के बारां जिले में निवासरत सहरिया आदिम जनजाति को भारत सरकार ने पी.वी. टी. जी. में शामिल कर रखा है ऐसी स्थिति में टी. एस. पी. घोषित करना अनुचित होगा। पदाधिकारियों ने मांग की है कि बारां जिले की किशनगंज व शाहबाद तहसीलों को सहरिया आदिम जनजाति (पीवीटीजी) क्षेत्र ही रहने दिया जाए व सहरिया विकास परियोजना के माध्यम से दी जा रही योजनाओं का लाभ जारी रखा जाए। और स्थानीय विधायक एवं गैरआदिवासी लोगों के द्वारा टीएसपी संघर्ष समिति के माध्यम से इस क्षेत्र को टीएसपी क्षेत्र घोषित करवाने की अनुचित माँग को खारिज किया जाए। ज्ञापन देने वालों में मथुरा लाल सहरिया, अध्यक्ष किसान विकास समिति, लडडू लाल सहरिया अध्यक्ष सहकारी समिति लैंप्स टोडीया के साथ ही समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau
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