बारां नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित युवा संगोष्ठी में राष्ट्र निर्माण, भारतीय संस्कृति, स्वदेशी चिंतन, आत्मनिर्भरता, विज्ञान एवं तकनीक तथा युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी के अंत में युवाओं ने राष्ट्र की एकता, भारतीय संस्कृति, स्वावलंबन एवं समाज सेवा के लिए सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता बलिराम, अखिल भारतीय सद्भावना प्रमुख ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आधार बनाकर देश को आत्मनिर्भर और विश्व कल्याण का मार्गदर्शक बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और धातु विज्ञान सहित अनेक क्षेत्रों में भारत का प्राचीन योगदान महत्वपूर्ण रहा है। शून्य, दशमलव पद्धति, खगोल गणना और आयुर्वेद जैसी भारतीय ज्ञान परंपराओं ने विश्व को दिशा दी है। आज भारत अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है।

मुख्य वक्ता ने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, परंपरा और जीवन-दृष्टि से है। भारतीय चिंतन “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर आधारित है। प्रकृति, प्राणी मात्र और मानव कल्याण के प्रति संवेदनशीलता भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है।







संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना एवं राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ता ने बताया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय एकता, संगठन और चरित्र निर्माण के उद्देश्य से संघ की स्थापना की। संघ द्वारा सेवा, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गौरवशाली परंपराओं को समझते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीक को अपनाएं तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, आत्मनिर्भरता, सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध से देश को और मजबूत बनाया जा सकता है।

संगोष्ठी में युवाओं ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्र की एकता, स्वावलंबन और समाज सेवा के प्रति सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। इस दौरान राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, आत्मनिर्भरता और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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