बारां। जिले की सड़कों पर सुगम आवागमन सुनिश्चित करने और जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। मंगलवार को मिनी सचिवालय के सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक जिला कलक्टर भंवरलाल जनागल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के दौरान कलक्टर जनागल ने कड़े लहजे में निर्देश दिए कि जिले के सभी मार्गों पर यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए संबंधित विभाग त्वरित और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क हादसों के संभावित कारणों का निराकरण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले की सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सहित गड्ढों को भरने का कार्य युद्ध स्तर पर पूर्ण हो। वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर वाहनों की अनाधिकृत पार्किंग को तत्काल हटाने और व्हाइट लाइनिंग कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से रानीबड़ौद में पुलिस थाने के सामने डिवाइडर फांदकर वाहन गुजारने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा गया। बैठक में शाहबाद वन क्षेत्र से गुजरने वाले हाईवे पर वाइल्ड लाइफ जोन के संकेतक बोर्ड लगाने और भूसा लदे वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी, सदस्य सचिव एवं पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता हुकमचंद मीणा, जिला परिवहन अधिकारी डॉ. कल्पना शर्मा, नगर परिषद आयुक्त भुवनेश मीणा सहित एनएचएआई, वन विभाग और यातायात पुलिस के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

दूसरी ओर, जिला प्रशासन की इन कवायदों के बीच आमजन ने शहर की जर्जर आंतरिक सड़कों और प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा रोष व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि नगर परिषद और सार्वजनिक निर्माण विभाग की बैठकें केवल कागजी खानापूर्ति और 'लीपापोती' तक सीमित रहती हैं। बारां व्यापार महासंघ और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बार-बार ध्यानाकर्षण के बावजूद धरातल पर सुधार की कमी खल रही है। जनता का कहना है कि बैठकों के बाद यातायात पुलिस सक्रिय तो होती है, लेकिन वह नियमों की आड़ में निर्दोष वाहन चालकों को परेशान करने लगती है। प्रताप चौक जैसे व्यस्त क्षेत्रों में निर्धारित लाइन के भीतर खड़ी बाइकों के चालान काटने की शिकायतों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहर में पार्किंग व्यवस्था का अभाव इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रहा है। वाहन चालकों की मजबूरी है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर वाहन खड़े करें, जबकि अंबेडकर सर्किल और पुलिया जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर निजी बसों और हाथ-ठेला व्यवसायियों का स्थायी अतिक्रमण बना हुआ है। कोटा रोड से लेकर चार मूर्ति चौराहे तक राजस्थान राज्य लोक परिवहन की बसों और जीपों के सड़क किनारे खड़े रहने से मार्ग संकरा हो जाता है, जो किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है। शहरवासियों ने मांग की है कि प्रशासन केवल निर्देश न दे, बल्कि धरातल पर अतिक्रमण हटाकर और पार्किंग की सुचारू व्यवस्था कर आमजन को राहत प्रदान करे।

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