बारां। राजस्थान के बारां जिले में कानून-व्यवस्था की आड़ में पुलिस प्रशासन द्वारा अपनाए जा रहे ढुलमुल रवैये और तानाशाही पूर्ण कार्यप्रणाली के खिलाफ स्थानीय व्यापारियों, संस्थाओं और आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है। भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां शाम सात बजे तक सूरज की तपिश और लू का असर रहता है, वहीं आम नागरिक परिवार सहित सैर-सपाटे के लिए रात में ही घरों से बाहर निकल पाते हैं। रात्रि आठ बजे से शहर का चौपाटी बाजार मुख्य रूप से गति पकड़ता है, जिसके चलते फुटकर, चाय-पान और ठंडे पेयजल पदार्थों के छोटे व्यवसाई अपनी आजीविका चलाने के लिए सड़क किनारे दुकानें सजाते हैं। विडंबना यह है कि जैसे ही यह व्यापार अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगता है, वैसे ही साढ़े दस से पौने ग्यारह बजे के बीच पुलिसकर्मी गाड़ी का पपईया (हूटर) बजाना शुरू कर देते हैं। पुलिस द्वारा बेहद अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करते हुए व्यापारियों और राहगीरों को इस तरह खदेड़ा जाता है, मानो वहां कोई बम विस्फोट हो गया हो। रात्रि गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों की इस अमर्यादित भाषा से पूरे शहर के प्रबुद्ध नागरिकों में नाराजगी है।

इस गंभीर मुद्दे को लेकर बारां व्यापार महासंघ के अध्यक्ष योगेश बाटा, वरिष्ठ पदाधिकारी व कृषि उपज मंडी व्यापार मंडल के पदाधिकारी देवकीनंदन बंसल, ललित मोहन खंडेलवाल, विमल बंसल, कमलेश विजय, कमलेश गोयल, जगदीश बंसल, प्रशांत विजयवर्गीय, आनंद बंसल, दिनेश बंसल, भानू पोरवाल, हेमंत गुप्ता और राजेंद्र खींची सहित अन्य प्रमुख व्यवसायियों ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि गर्मी के कारण रात करीब नौ बजे कृषि उपज मंडी सहित विभिन्न बाजारों के व्यापारियों का भ्रमण शुरू होता है और अनेक परिवार चौपाटी पहुंचते हैं, परंतु निर्धारित समय से पहले ही पुलिस का दमनचक्र शुरू हो जाता है। शहर के संभ्रांत नागरिकों और व्यापारियों ने व्यापार महासंघ के माध्यम से जिला पुलिस अधीक्षक और स्थानीय विधायक राधेश्याम बेरवा से लिखित शिकायत की है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस तंत्र अपनी जिद पर अड़ा हुआ है। व्यापारियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर जनसमस्या पर या तो जिला प्रशासन की हां में हां मिला रहे हैं या उनके समक्ष नतमस्तक नजर आ रहे हैं। बड़ी-बड़ी डींगें हांकने वाले जनप्रतिनिधियों का यह असहाय रवैया आम जनता के गले नहीं उतर रहा है। यदि उन्होंने समय रहते व्यापारियों के पक्ष में खड़े होकर इस दमनकारी रवैये को बंद नहीं कराया, तो आने वाले समय में जनता उन्हें करारा जवाब देगी।

एक तरफ जहां राज्य सरकार रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए २४ घंटे दुकानें खोलने की योजना को अमलीजामा पहना रही है, वहीं दूसरी तरफ बारां पुलिस अपने खुद के नियम चलाकर सरकार की मंशा को धता बता रही है। पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था के नाम पर रात ग्यारह बजे से पूर्व ही बाजार खाली करा देने से सड़कें पूरी तरह सुनसान हो जाती हैं। इसके बाद पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी खत्म मानकर सो जाते हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं और वे सक्रिय उठते हैं। यदि पुलिस की कार्यशैली वास्तव में प्रभावशाली होती, तो अपराधियों में भय होता। इस जल्दबाजी का खामियाजा उन यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है जो देर रात ट्रेनों और बसों से बारां पहुंचते हैं। उन्हें स्टेशन या बस स्टैंड से उतरने के बाद कोई साधन नहीं मिलता और सूनी सड़कों पर अनहोनी की आशंका के बीच पैदल ही अपने घरों की ओर जाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में सीजन के चलते कृषि उपज मंडी में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से कृषि जिंसों की बंपर आवक हो रही है। दूर-दराज से आने वाले किसान फसल खाली करने के बाद जब देर रात भोजन की तलाश में निकलते हैं, तो उन्हें दर-दर भटकना पड़ता है क्योंकि पुलिस बलपूर्वक सभी होटल और दुकानें बंद करवा चुका होता है। मंडी व्यापारियों और महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पुलिस प्रशासन तुरंत प्रभाव से रात्रि १२:०० बजे तक चौपाटी और फुटकर दुकानें खोलने की लिखित स्वीकृति दे, अन्यथा इस मनमानी के खिलाफ सीधे मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से शिकायत की जाएगी और जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story