बारां कोतवाली सीआई योगेश चौहान लाइन हाजिर, गौसेवकों पर लाठीचार्ज मामला
बारां बंद के दौरान गौसेवकों पर हुए लाठीचार्ज के बाद एसपी ने कोतवाली प्रभारी सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर की कार्रवाई, आरपीएस भजनलाल को सौंपा गया प्रभार।

बारां के प्रताप चौक पर 9 फरवरी को गौसेवकों पर हुए लाठीचार्ज और प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन करते विधायक राधेश्याम बैरवा व अन्य नागरिक।
प्रशासनिक फेरबदल और पूर्व नियुक्तियां
पुलिस अधीक्षक ने चौहान के स्थान पर प्रशिक्षु आर पी एस भजनलाल को थाना कोतवाली के सीआई का चार्ज सोंपा है। इससे पूर्व इस मामले में निम्नलिखित अधिकारियों को लाइन हाजिर किया जा चुका है:
- सहायक उप निरीक्षक अमरचंद
- सहायक उप निरीक्षक कृष्ण मुरारी
- सहायक उप निरीक्षक मनीष
घटनाक्रम: आंदोलन और लाठीचार्ज
ज्ञात रहे कि 9 फरवरी को बारां बंद के दौरान निहत्थे लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे गौ सेवकों पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर तितर-बितर दिया था। लाठी चार्ज के दौरान कई बेकसूर लोगों को गंभीर चोटें आई थी जिसमें एक बालक तथा एक अन्य व्यक्ति भी था जो किसी कार्यवर्ष कहीं जा रहा था, वह भी गंभीर घायल हो गया था।
शहर के भूल भुलैया चौराहे के पास गत 7-8 फरवरी को गाय के एक नन्है बछड़े का कटा हुआ आधा शव मिलने के बाद आंदोलन भड़क गया था। इसमें गौसेवकों ने जिला एवं पुलिस प्रशासन से मांग की थी कि:
- इस मामले की पुख्ता जांच करवाई जाए।
- पता लगाया जाए कि इस प्रकार का कूकृत्य किसने किया है।
राजनीतिक विरोध और गहराते सवाल
9 फरवरी को शहर के प्रताप चौक पर सैकड़ो गौसेवकों तथा व्यापारियों एवं अन्य समाजसेवियों द्वारा आंदोलन किया गया था। इस दौरान पुलिस ने लाठी चार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर कर दिया था। यह मामला इतना तूल पकड़ गया कि विधायक राधेश्याम बैरवा सहित भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश सिंह सिकरवार सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने भी थाना कोतवाली पहुंचकर इस लाठी चार्ज का विरोध किया।
आम नागरिकों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं का कहना था कि "लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे गौसेवकों पर इस प्रकार बेदर्दी से लाठीचार्ज किया जाना कहां का न्याय है"। इस घटना को लेकर प्रदेश स्तर तक की राजनीति भी प्रभावित हुई है, बल्कि मामला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक भी पहुंच गया था।
अनसुलझे सवाल और जवाबदेही
आश्चर्य की बात यह है कि शहर कोतवाली योगेश चौहान ने किसके आदेश से लाठीचार्ज कारवाया है यह तथ्य उजागर होने से छिपाए जा रहे हैं, इसका पता भी साफ तौर पर चलना चाहिए।
लाठीचार्ज के आदेश किसने जारी किए थे इसका अभी तक भी पता नहीं चल पाया है जबकि प्रशासन को सब मालूम है। क्योंकि यह सर्वविदित है कि आला अधिकारियों के बिना कोतवाल लाठीचार्ज का आदेश दे ही नहीं सकता, इसकी तह तक भी पहुंचने की आवश्यकता है। इस प्रकार के आंदोलनों को दबाने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ भाजपा को सख्त कदम उठाने होंगे।

Pratahkal Bureau
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