बारां। राजस्थान के बारां जिले में वन संपदा पर भू-माफियाओं और अतिक्रमियों के बढ़ते दुस्साहस ने अब किसानों और पर्यावरण प्रेमियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। किशनगंज रेंज के करवरीकलां नाका क्षेत्र में देखते ही देखते 200 हेक्टेयर की बेशकीमती वन भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है। इस गंभीर संकट को देखते हुए किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने हुंकार भरी है। प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने वन विभाग के उपवन संरक्षक (डीएफओ) से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस 'जंगल राज' को खत्म नहीं किया गया, तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।

मामले की तह में जाएं तो पता चलता है कि तहसील किशनगंज की इस रेंज में वन विभाग ने क्लोजर बनाकर पौधारोपण का संकल्प लिया था। लेकिन वर्तमान स्थिति डराने वाली है। रक्षक ही भक्षक बने हैं या फिर विभाग की ढिलाई, इसका नतीजा यह है कि अतिक्रमियों ने सुरक्षित क्लोजर के भीतर ही पक्के मकान और टापरियां तान ली हैं। इतना ही नहीं, वन विभाग की जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर फसलें लहलहा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई सख्त कार्रवाई न होने के कारण अतिक्रमियों के हौसले बुलंद हैं।

संकट यहीं खत्म नहीं होता। हाल ही में विभाग ने इसी क्षेत्र में 50 हेक्टेयर का एक और नया क्लोजर तैयार किया है, लेकिन पुराने क्लोजर की शेष भूमि पर अब पत्थरों की दीवारें खड़ी की जा रही हैं। किसान नेताओं का कहना है कि अगर वन विभाग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो भविष्य में सरकार के पास केवल कागजों पर जंगल बचेगा, जमीन पर सिर्फ अतिक्रमण होगा। इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाने वालों में जिला मंत्री रमेशचंद मीणा, खंड प्रमुख विकास मीणा, बुद्धिप्रकाश शर्मा करवरीकलां, प्रवीण कुमार, रामस्वरूप मीणा, लालचंद कुशवाह, राजेंद्र कुशवाह, सुरेश मीणा, जसवंत मीणा, बलवीर सिंह, ओमप्रकाश और जयराम सहित अनेक किसान प्रतिनिधि शामिल रहे। अब सबकी नजरें वन विभाग पर टिकी हैं कि क्या डीएफओ इन अवैध कब्जों पर पीला पंजा चला पाएंगे या वन भूमि का यह विनाश यूं ही जारी रहेगा।

Pratahkal Bureau

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