परवन वृहद सिंचाई परियोजना की धीमी रफ्तार पर किसानों का आक्रोश, 28 जुलाई को आम सभा का ऐलान
बारां में नहरी किसान संघर्ष एवं सिंचाई समिति की बैठक में परवन वृहद सिंचाई परियोजना की धीमी प्रगति पर किसानों ने नाराजगी जताई। अभियंताओं और राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए 28 जुलाई को आम सभा बुलाने तथा आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया गया।

बारां में नहरी किसान संघर्ष एवं सिंचाई समिति के सदस्य परवन वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्य की गति को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए।
बारां में नहरी किसान संघर्ष एवं सिंचाई समिति की बैठक किसान भवन धानमंडी में आयोजित की गई, जिसमें परवन वृहद सिंचाई परियोजना की प्रगति, सदस्यता अभियान और आगामी आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में एक वर्ष के भीतर 313 गांवों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली परवन वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्य की धीमी गति पर चिंता व्यक्त करते हुए आम सभा आयोजित करने तथा सदस्यता अभियान को घर-घर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
बैठक की अध्यक्षता नहरी किसान संघर्ष समिति के सलाहकार गिरिराज बोहरा ने की। अतिथि के रूप में पर्यावरणविद प्रशांत पाटनी, शिक्षाविद हंसराज मीणा, कांग्रेस के मीडिया प्रभारी संध्या जडेजा, भाजपा के प्रदेश प्रतिनिधि महावीर बारीवाल, जल उपभोग संगम की मांगी बाई मीणा, नहरी किसान संघर्ष समिति के संगठन मंत्री रामावतार मीणा, कोषाध्यक्ष चैथमल सुमन, कार्यालय मंत्री राजेंद्र गौड, महेंद्र सुमन, मोतीलाल मीणा, कवि बृजराज यादव, नंदलाल मीणा, मोहित नागर, इकलेरा ग्राम सेवा सहकारी समिति के उपाध्यक्ष राजबिहारी यादव तथा बृजमोहन मेघवाल उपस्थित रहे। बैठक का संचालन नहरी किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन यादव ने किया।
परवन वृहद सिंचाई परियोजना की प्रगति को लेकर आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बांध का कार्य धीमी गति से चलने का एक कारण यह भी है कि अभियंताओं ने अपने एयर कंडीशन कार्यालयों से बाहर निकलने की आवश्यकता नहीं समझी। उनका कहना था कि जिन अधिकारियों ने मेहनत की, उन्होंने मजबूरी में अपना सामान समेटकर स्थानांतरण करवा लिया, जबकि निष्क्रिय अधिकारियों को यहीं छोड़ दिया गया।
बैठक में वक्ताओं ने राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या राजस्थान सरकार इन निठल्ले अभियंताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गत वर्षों में अंता की चुनावी आमसभा में दी गई गारंटी पूरी करवाने की जिम्मेदारी नहीं निभा सकती? उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि ऐसे निठल्ले अधिकारी काम ही नहीं करना चाहते। वक्ताओं के अनुसार संविदा कंपनी जीवीपीआर दाईं और बाईं मुख्य नहर के निर्माण कार्य को कछुआ चाल से चला रही है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों को कोई समस्या दिखाई नहीं दे रही, क्योंकि यदि काम तेज होगा तो उन्हें निर्माण स्थल का निरीक्षण करने जाना पड़ेगा।
बैठक के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने तत्काल प्रभाव से अभियंताओं का घेराव करने तथा राज्य सरकार के जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से दिए जाने वाले मांग पत्रों के साथ अब सूचना के अधिकार के तहत जवाबदेही तय करवाने के विचार भी व्यक्त किए।
बैठक में बताया गया कि इस विषय को लेकर 28 जुलाई को शिव गणेश मंदिर धानमंडी प्रांगण में आम सभा आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता संयोजक मुरलीधर मीणा करेंगे। नहरी किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन यादव ने कहा कि स्थानांतरण की प्रक्रिया में उन अभियंताओं को शामिल किया जाए जिन्होंने बिल्कुल काम नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बारां खंड के अभियंता पूरी तरह निष्क्रिय हैं। उनका कहना था कि डेम का निर्माण पूरा हो चुका है और अब दाईं तथा बाईं मुख्य नहरों का कार्य एक वर्ष में पूरा कराने के लिए राज्य सरकार को बाध्य करने हेतु रैलियां, धरने और प्रदर्शन निरंतर जारी रखने होंगे।

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