बारां नगर परिषद में पिछले ढाई वर्षों से स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने का असर अब परिषद की आय और शहर के विकास कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। बार-बार अस्थाई आयुक्त की नियुक्ति वर्तमान राजनीति की कमजोर इच्छा शक्ति को भी उजागर कर रही है। प्रशासनिक नेतृत्व के अभाव में परिषद की वित्तीय व्यवस्था लगातार कमजोर पड़ रही है, जिससे करोड़ों रुपए के राजस्व पर असर पड़ रहा है और शहर के कई जरूरी विकास कार्य अधर में लटक गए हैं।

जानकारी के अनुसार नगर परिषद में लंबे समय से कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे काम चलाया जा रहा है। स्थायी आयुक्त नहीं होने के कारण राजस्व वसूली, निर्माण अनुमति, लीज नवीनीकरण, दुकानों के किराया संग्रह, विज्ञापन शुल्क, हाउस टैक्स और अन्य आय स्रोतों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर परिषद की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार कई मामलों में फाइलें लंबित पड़ी हुई हैं, जिससे नगर परिषद को मिलने वाला राजस्व समय पर जमा नहीं हो पा रहा। वहीं अवैध निर्माण, बकाया कर वसूली और अतिक्रमण जैसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से परिषद को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नगर परिषद की आय प्रभावित होने का असर शहर के विकास कार्यों पर भी साफ नजर आने लगा है। सड़क निर्माण, नालियों की मरम्मत, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई कार्य बजट और प्रशासनिक स्वीकृतियों के अभाव में कछुवा चाल से चल रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि नगर परिषद में स्थायी आयुक्त की नियुक्ति होती तो राजस्व व्यवस्था मजबूत होती और विकास कार्यों में तेजी आती।

व्यापारियों और आम नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक अस्थिरता के कारण नगर परिषद की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा नुकसान शहर की जनता को उठाना पड़ रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिले में भाजपा सरकार के ढाई साल पूरे होने के बावजूद बारां नगर परिषद को अब तक स्थायी आयुक्त नहीं मिल पाया है।

इधर, एक और अहम चर्चा चौपालों, राजनीतिक हलकों और आमजन के बीच लगातार उठ रही है कि वर्षों से नगर परिषद में जमे कर्मचारी और अधिकारी आखिर कब स्थानांतरित होंगे। नगर परिषद की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और धीमे विकास कार्यों के बीच स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व की मांग अब और तेज होती दिखाई दे रही है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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