बारां नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव परिणाम ने स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। तीसरे फ्रंट के रूप में चुनाव मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी ने 31 वार्डों में जीत दर्ज कर दोनों राष्ट्रीयकृत पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के मंसूबों पर झाड़ू चला दी। कांग्रेस को 18, भाजपा को 9 और दो निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली है।

बारां नगर परिषद के 60 वार्डों में जिस तरह चुनाव संपन्न हुए, उससे शुरुआत से ही मुकाबला रोचक रहने के संकेत मिल रहे थे। भाजपा जहां कांग्रेस बोर्ड की एंटी इनकंबेंसी का दम भर रही थी, वहीं कांग्रेस अपने 15 साल के लंबे इतिहास को दोहराने की कोशिश में थी। ऐसे राजनीतिक मुकाबले के बीच पूर्व सभापति कमल राठौर के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने आशातीत सफलता हासिल करते हुए जनता का विश्वास जीत लिया।

आम आदमी पार्टी की जीत के बाद पूर्व सभापति कमल राठौर ने कहा कि यह जीत आम आदमी और विकास कार्यों की जीत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जनता ने उन पर और उनके प्रत्याशियों पर विश्वास किया है, उस विश्वास पर खरा उतरकर दिखाएंगे।

आम आदमी पार्टी के पूर्ण बहुमत हासिल करने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। दूसरी ओर भाजपा में मायूसी का माहौल नजर आ रहा है, जबकि कांग्रेस के बोर्ड बनाने के सपने भी पूरे नहीं हो पाए। नगर परिषद के चुनाव में कांग्रेस के 18, भाजपा के 9 और दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।

भाजपा के कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट वितरण में कई प्रकार की खामियां रही हैं। उनके अनुसार सर्वे के अनुरूप टिकट वितरण नहीं होना भी चुनाव परिणाम का एक कारण रहा। इसके अलावा कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं की बेरुखी को भी बड़ा मुद्दा माना जा रहा है।

इन चुनाव परिणामों के बाद अब आम आदमी पार्टी का सभापति बनना तय माना जा रहा है, जिसके लिए शीतल राठौर का नाम प्रथम प्राथमिकता पर है।

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा की हार को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। आमजन के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस शर्मनाक हार के बाद भाजपा के पदाधिकारी जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा देंगे। यदि ऐसा नहीं होता है तो पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर मंथन की आवश्यकता बताई जा रही है, क्योंकि भावी राजनीति की रूपरेखा तय की जानी है।

वहीं, यह भी चर्चा है कि यदि यही हालात बने रहे तो आगामी चुनाव में भी भाजपा को ऐसे ही परिणाम देखने को मिल सकते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की ओर से सभापति बनने का सपना देख रहे कई दिग्गज भी चुनाव हार गए। जो दिग्गज चुनाव जीतने में सफल रहे, वे भी चुनाव परिणाम के बाद मन मसोस कर बैठे हैं। बारां नगर परिषद के परिणाम ने स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है, जबकि आम आदमी पार्टी 31 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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