राजस्थान के यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बारां प्रवास के दौरान नगर परिषद धर्मशाला में आयोजित शिविर में उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई जब भाजपा के ही वरिष्ठ नेताओं ने युवा नेताओं और पार्षदों को मंत्री के सामने अपना पक्ष रखने से रोक दिया। मंगलवार को हुए इस आयोजन में न केवल युवा नेताओं और पार्षदों को बोलने से रोका गया, बल्कि पत्रकारों को भी मंत्री से सवाल करने की अनुमति नहीं दी गई। इस घटना ने बारां भाजपा के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है।

भाजपा के युवा नेता, पार्षद और पत्रकार नगर परिषद की बदहाल सफाई व्यवस्था, घर-घर कचरा संग्रहण की स्थिति, शहर की उधड़ी हुई सड़कों और जलभराव जैसी जनहित की समस्याओं को लेकर मंत्री झाबर सिंह खर्रा से सवाल-जवाब करना चाहते थे। इससे पहले कि मंत्री इन मुद्दों पर कोई जवाब देते, वहां उपस्थित भाजपा के जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने सवाल पूछने वालों को रोक दिया। इस वाकये के बाद अब यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आखिर जनप्रतिनिधि और पार्टी नेता अपनी कमियों को छुपाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं।

पार्टी के कार्यकर्ताओं, वार्ड पार्षदों और युवा नेताओं में नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है। वे चाहते हैं कि यहां तैनात अधिकांश अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला कहीं दूर किया जाए और उनके स्थान पर स्वच्छ छवि वाले आयुक्त और अन्य कर्मियों की तैनाती हो, ताकि जनता की समस्याओं का बारीकी से समाधान हो सके। इसके साथ ही, भाजपा के कई प्रभावशाली और पृष्ठभूमि से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी संगठन से दूरी बना रखी है, जिनकी नाराजगी के कारणों को जानने का कभी प्रयास नहीं किया गया। फिलहाल, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने वहां के हालातों को समझ लिया है और अब जयपुर लौटकर वे मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर क्या समीक्षा करते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Pratahkal Newsroom

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