बारां: चिकित्सा विभाग में 56 लाख के SDRF फंड में धांधली का आरोप
भाजपा नेता प्रशांत विजयवर्गीय ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के आरोप लगाकर जांच की मांग की।

बारां में प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा नेता प्रशांत विजयवर्गीय (बाएं) और हरीश नागर (दाएं) चिकित्सा विभाग में हुए कथित भ्रष्टाचार की जानकारी देते हुए।
बारां। बारां जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के अंतर्गत प्राप्त लगभग 56 लाख रुपये की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगा है। भाजपा के युवा नेता प्रशांत विजयवर्गीय ने इस मामले में वित्तीय धांधली की आशंका जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की पुरजोर मांग की है। विजयवर्गीय का स्पष्ट कहना है कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी तह तक जाना आवश्यक है।
प्रशांत विजयवर्गीय के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में वित्तीय नियमों एवं शासन के दिशा-निर्देशों की स्पष्ट अनदेखी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे एक बड़े घोटाले की आशंका प्रबल हो गई है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की भूमिका इस प्रकरण में संदेह के घेरे में है। उन पर आरोप है कि बिना आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों के ही भारी-भरकम राशि का मनमाने ढंग से उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त, व्यय से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अभिलेखों में भी भारी विसंगतियां पाई गई हैं।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि जिले के कई चिकित्सा उप-केंद्रों पर कागजों में तो मरम्मत एवं निर्माण कार्य पूर्ण दर्शा दिए गए, किंतु धरातल पर कोई ठोस कार्य संपन्न नहीं हुआ। इसके बावजूद, संबंधित अधिकारियों ने कूट रचित उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC/CC) एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कर भुगतान हेतु बिल जिला कलेक्ट्रेट स्थित SDRF सहायता कार्यालय में प्रस्तुत कर दिए।
स्थानीय निवासियों और भाजपा नेता प्रशांत विजयवर्गीय का मानना है कि यदि इस प्रकरण की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो सरकारी धन के दुरुपयोग का यह खेल और गहरा सकता है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए सुगबुगाहट तेज है। प्राप्त सूचना के अनुसार, जिन कार्यों का भुगतान पहले ही उठाया जा चुका था और जो वास्तव में अधूरे थे, उन्हें अब आनन-फानन में चालू करवाया गया है।
इस संवेदनशील मुद्दे पर भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व मंडल अध्यक्ष हरीश नागर मंडोला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रकरण सीधा मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले भ्रष्टाचार का सीधा दुष्परिणाम भविष्य में किसी बड़ी जनहानि या अप्रिय घटना के रूप में सामने आ सकता है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
