बारां। राजस्थान के बारां जिले में अध्यात्म की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। नेशनल हाईवे 27 पर पुलिस लाइन रोड के समीप स्थित निजी होटल परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार को कथा के विशेष प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय संत स्वामी गोविन्ददेव गिरी महाराज ने जीवन के मर्म को समझाते हुए एक कड़वा सत्य साझा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मनुष्य के जीवन में पतन और बर्बादी की नींव अक्सर उसके मित्र ही रखते हैं। गलत संगति व्यक्ति को विनाश के उस मार्ग पर ले जाती है, जहाँ से वापसी अत्यंत कठिन हो जाती है।

स्व. मुरलीधर साबू मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास ने कंस के उदाहरण से अपनी बात पुष्ट की। उन्होंने बताया कि जब कंस अपनी बहन देवकी की आठवीं संतान को मारने में विफल रहा, तो उसे अपनी भूल का आभास हुआ। उसने पश्चाताप करते हुए बहन और बहनोई को कारागार से मुक्त कर क्षमा भी मांगी। किंतु, उसी रात्रि जब उसने अपने पापी मित्रों और असुर सलाहकारों के साथ मंत्रणा की, तो उन्होंने कंस को पुनः अधर्म की राह पर धकेल दिया। उन्हीं मित्रों के परामर्श पर गोकुल और वृंदावन में निर्दोष शिशुओं के संहार का क्रूर प्रस्ताव पारित हुआ। महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज के दौर में भी नशा, जुआ और अन्य बुराइयों की शुरुआत मित्र ही करवाते हैं। शत्रु से सावधान रहना आसान है क्योंकि वह सामने होता है, लेकिन मित्र प्रेम का मुखौटा पहनकर जीवन बर्बाद कर देता है।

कथा के दौरान जब 'जो किसी के काम आए उसे इंसान कहते हैं' जैसे मर्मस्पर्शी भजनों की प्रस्तुति हुई, तो पूरा पाण्डाल भावविभोर हो उठा। स्वामी जी ने महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास का उदाहरण देते हुए कहा कि त्रुटि किसी से भी हो सकती है, परंतु महान वही है जो अपनी गलती को जानकर उसे तत्काल त्याग दे। जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सत्संग और कथाओं का श्रवण अनिवार्य है, जो आत्मिक उन्नति की सीढ़ियां चढ़ने में सहायक सिद्ध होती हैं।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर जैसे ही 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की' के जयकारे गूंजे, श्रद्धालु झूम उठे और महिलाएं नृत्य करने लगीं। इस गरिमामयी आयोजन में आयोजक साबू परिवार के विष्णु साबू एवं परिजनों ने व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर कोटा, इंदौर, सूरत और जयपुर सहित देश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने महाराज का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। विष्णु साबू ने बताया कि यह आध्यात्मिक आयोजन 11 जनवरी तक अनवरत जारी रहेगा, जिसमें क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी आध्यात्मिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story