बारां: मनुष्य की बर्बादी का आरंभ गलत मित्रों से होता है— स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज
बारां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने समाज को चेताया कि मनुष्य की बर्बादी का कारण गलत संगति और मित्र होते हैं। कंस और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के माध्यम से उन्होंने जीवन परिवर्तन का मार्ग बताया। जानें साबू मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन की पूरी रिपोर्ट।

बारां। राजस्थान के बारां जिले में अध्यात्म की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। नेशनल हाईवे 27 पर पुलिस लाइन रोड के समीप स्थित निजी होटल परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार को कथा के विशेष प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय संत स्वामी गोविन्ददेव गिरी महाराज ने जीवन के मर्म को समझाते हुए एक कड़वा सत्य साझा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मनुष्य के जीवन में पतन और बर्बादी की नींव अक्सर उसके मित्र ही रखते हैं। गलत संगति व्यक्ति को विनाश के उस मार्ग पर ले जाती है, जहाँ से वापसी अत्यंत कठिन हो जाती है।
स्व. मुरलीधर साबू मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास ने कंस के उदाहरण से अपनी बात पुष्ट की। उन्होंने बताया कि जब कंस अपनी बहन देवकी की आठवीं संतान को मारने में विफल रहा, तो उसे अपनी भूल का आभास हुआ। उसने पश्चाताप करते हुए बहन और बहनोई को कारागार से मुक्त कर क्षमा भी मांगी। किंतु, उसी रात्रि जब उसने अपने पापी मित्रों और असुर सलाहकारों के साथ मंत्रणा की, तो उन्होंने कंस को पुनः अधर्म की राह पर धकेल दिया। उन्हीं मित्रों के परामर्श पर गोकुल और वृंदावन में निर्दोष शिशुओं के संहार का क्रूर प्रस्ताव पारित हुआ। महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज के दौर में भी नशा, जुआ और अन्य बुराइयों की शुरुआत मित्र ही करवाते हैं। शत्रु से सावधान रहना आसान है क्योंकि वह सामने होता है, लेकिन मित्र प्रेम का मुखौटा पहनकर जीवन बर्बाद कर देता है।
कथा के दौरान जब 'जो किसी के काम आए उसे इंसान कहते हैं' जैसे मर्मस्पर्शी भजनों की प्रस्तुति हुई, तो पूरा पाण्डाल भावविभोर हो उठा। स्वामी जी ने महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास का उदाहरण देते हुए कहा कि त्रुटि किसी से भी हो सकती है, परंतु महान वही है जो अपनी गलती को जानकर उसे तत्काल त्याग दे। जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सत्संग और कथाओं का श्रवण अनिवार्य है, जो आत्मिक उन्नति की सीढ़ियां चढ़ने में सहायक सिद्ध होती हैं।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर जैसे ही 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की' के जयकारे गूंजे, श्रद्धालु झूम उठे और महिलाएं नृत्य करने लगीं। इस गरिमामयी आयोजन में आयोजक साबू परिवार के विष्णु साबू एवं परिजनों ने व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर कोटा, इंदौर, सूरत और जयपुर सहित देश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने महाराज का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। विष्णु साबू ने बताया कि यह आध्यात्मिक आयोजन 11 जनवरी तक अनवरत जारी रहेगा, जिसमें क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी आध्यात्मिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

Pratahkal Bureau
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