बारां: खेडिया हनुमान मंदिर में पांच संतों का समागम, गौरक्षा का आह्वान
गोविंदपुरा और बडवा के बीच स्थित मंदिर में संतों ने नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना पर चर्चा कर आशीर्वाद दिया।

बारां के खेडिया हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित संत समागम के दौरान उपस्थित महामण्डलेश्वर सर्वेश्वरदास जी महाराज, बर्फानी बाबा, रघुवर दास जी, नरसिंहाचार्य जी और निर्मलदास जी महाराज।
बारां। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती गोविन्दपुरा और बडवा के मध्य स्थित सुप्रसिद्ध खेडिया हनुमान मंदिर परिसर इन दिनों दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है। इसी स्थान पर संतों के मिलन का समारोह सम्पन्न हुआ, जिसमें भारत के अलग-अलग स्थानों से पधारे हुए पाँच संतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
सिद्ध संतों का विधि-विधान से पूजन और अभिनंदन
इस क्षेत्र में यज्ञों के प्रणेता नईनाथ धाम के महामण्डलेश्वर सर्वेश्वरदास जी महाराज, बद्रीनाथ धाम के बर्फानी बाबा महाराज, हरियाणा के रघुवर दास जी महाराज, ब्रह्मकुंड के महंत नरसिंहाचार्य जी महाराज एवं एसी हनुमान मंदिर गजनपुरा के निर्मलदास जी महाराज का उपस्थितजनों ने विधि-विधान से पूजन, वंदन और अभिनंदन कर आशीष प्राप्त किया। इस पवित्र मिलन के दौरान संतों के बीच 'संत समागम और समाज' विषय पर गहन चर्चा हुई।
गौरक्षा और नैतिक मूल्यों की स्थापना पर मंथन
संतों ने सामूहिक स्वर में गौवंश की दुर्दशा पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना, सज्जन शक्ति का जागरण कर समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना तथा गौमाताओं की रक्षा करना ही धर्म का असली उद्देश्य है। अपने 'अमृत वचनों' से लाभान्वित करते हुए संतों ने मानव जीवन को विशेषकर अंतिम पड़ाव को सुखद और मंगलमय बनाने के मार्ग बताए। उन्होंने कहा कि "बिनु हरिकृपा मिलें नहीं संता"—अर्थात प्रभु की कृपा के बिना संतों का दर्शन सुलभ नहीं होता और संत ही प्रभु से मिलने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
आध्यात्मिक वातावरण और सेवा भाव का अनुपम उदाहरण
संतों के एक दिवसीय मिलन के कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक रहा। आचार्य परमानंद ने अत्यंत भावुक स्वर में कहा, "इन महान संतों के दर्शन और पूजन से मेरा जीवन धन्य हो गया है। आयु के इस पड़ाव पर संतों का यह आशीष मुझे निरंतर सत्कर्म करते रहने की नई ऊर्जा प्रदान करता रहेगा!" संगत के पश्चात पारंपरिक श्रद्धा के साथ रामविलास जी एवं परिवार जनों द्वारा संतों को 'पंगत' (भोजन-प्रसादी) एवं बिदाई कराई गई, जो सौहार्द और सेवा भाव का अनुपम उदाहरण रही।
आगामी श्रीराम मारुति महायज्ञ का निमंत्रण
महामण्डलेश्वर सर्वेश्वरदास जी महाराज ने इसी स्थान पर 19 मई से आयोजित श्रीराम मारुति महायज्ञ एवं श्रीरामकथा में पधारने का निमंत्रण भी दिया।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
