बारां। जिला मुख्यालय के समीप स्थित खेडिया हनुमान मंदिर परिसर में महामण्डलेश्वर सर्वेश्वरदास त्यागी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित 21 कुण्डीय महायज्ञ आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पवित्र आहुतियां अर्पित की जा रही हैं। इसी क्रम में चल रही रामकथा में संत कैलाश अनाडी, आचार्य परमानंद एवं चन्द्रमौलेश्वर का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। गुरुवार को आयोजित कथा के मुख्य यजमान के रूप में अनूप मालव ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में बारां-अटरू विधायक राधेश्याम बै



रवा ने सम्मिलित होकर रामचरित मानस ग्रन्थ का विधिवत पूजन किया और उपस्थित संतों का आशीर्वाद ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा करना और उनकी आज्ञा का पालन करना ही मनुष्य का परम कर्तव्य है। उन्होंने कथा के सफल आयोजन के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथावाचक ने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई 'परहित सरिस धरम नहिं भाई' का स्मरण कराते हुए कहा कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है। रामकथा मनुष्य के भीतर निहित अहंकार का नाश कर उसे लोक-कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ राम का वास होता है, वहाँ कामदेव यानी वासना का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब मनुष्य 'कानदेव' अर्थात अफवाहों और कान के कच्चे होने की प्रवृत्ति के वशीभूत होता है, तब वह सब कुछ उपलब्ध होने के बावजूद चरित्र के अकाल से घिर जाता है।

कथा के दौरान जटायु-रावण प्रसंग और जय-विजय की कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कठिन परिस्थितियों में जब बुद्धि भ्रमित हो जाए, तब केवल धर्म, सत्य, संत और ईश्वर का आश्रय लेना चाहिए, क्योंकि यही माध्यम समस्याओं को सुलझाने वाले हैं। वहीं, राजा प्रतापभानु के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को नकली गुरुओं से सावधान रहने और तृष्णा या लालच का त्याग करने की शिक्षा दी गई। व्यासजी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि ईश्वर की कृपा एक प्रसाद के समान है, जिसे अकेले ग्रहण करने से वैचारिक बदहजमी होती है; अतः इसे समाज में बांटना अनिवार्य है। उन्होंने अंत में सावधान करते हुए कहा कि अपने अच्छे कर्मों का अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि अंतर्यामी सब देख रहा है। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश में अंधेरा नहीं टिक सकता, उसी प्रकार जहाँ राम हैं, वहाँ कोई भी विकार अपना स्थान नहीं बना सकता। इस दिव्य कथा के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव से सराबोर नजर आए।

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Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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