राजस्थान के बारां जिले में प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। केलवाड़ा पुलिस चौकी के लिए आवंटित करोड़ों रुपए की बेशकीमती भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बावजूद उस पर दोबारा अवैध निर्माण कर दुकानें और मकान खड़े कर दिए गए हैं। इस गंभीर मामले को लेकर किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि काफी विवादित रही है। दांता ग्राम निवासी रामसिंह के आरोपों के अनुसार, पुलिस चौकी केलवाड़ा के निर्माण के लिए ग्राम दांता में स्टेट हाईवे के किनारे स्थित खसरा संख्या 39/2 की तीन बीघा भूमि का आवंटन वर्ष 2008 में किया गया था। इस बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमियों ने अवैध रूप से दुकानें और मकान बना लिए थे। लंबे संघर्ष के बाद, प्रशासन ने भारी पुलिस जाब्ते के साथ जेसीबी मशीन की मदद से 31 जनवरी 2021 को इस बड़े अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया था। उस समय तत्कालीन पुलिस थाना अधिकारी केलवाड़ा को पचास ट्रॉली पत्थरों समेत इस जमीन का सुपुर्दगीनामा लिखित में सौंप दिया गया था।






इसके बावजूद, कथित राजनीतिक संरक्षण के चलते अतिक्रमियों ने पुलिस अभिरक्षा में दी गई इस करोड़ों की जमीन पर दोबारा कब्जा कर लिया और वहां धड़ल्ले से नई दुकानें व पक्के मकान बना डाले। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने विगत 30 अक्टूबर को एक विशेष टीम का गठन कर जमीन का दोबारा सीमा ज्ञान (पैमाइश) करवाया। इस प्रशासनिक टीम की जांच रिपोर्ट में मौके पर सात दुकानें और नौ पक्के मकान बने होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह रिपोर्ट थानाधिकारी केलवाड़ा को सौंपी गई।

किसानों ने केलवाड़ा पुलिस थाना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आखिर पुलिस की मौजूदगी और सुपुर्दगी के बावजूद करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर दोबारा अवैध कब्जा कैसे होने दिया गया? किसान महापंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने किसानों को उचित जांच का ठोस आश्वासन दिया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह के साथ केलवाड़ा तहसील अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह, परमजीत सिंह और रामसिंह सहित कई अन्य पदाधिकारी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। यह मामला अब क्षेत्र में प्रशासनिक शिथिलता और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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