सनातन की रक्षा से ही संभव है देश की सुरक्षा: डॉ. रवींद्र शुक्ल, बारां में काव्य क्रांति विमोचन
बारां में हिंदी साहित्य भारती द्वारा कवि जगदीश सोनी की काव्य कृति 'काव्य क्रांति' का विमोचन हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. रवींद्र शुक्ल ने कहा कि सनातन की रक्षा ही देश की रक्षा का सशक्त माध्यम है।

तस्वीर में बारां में आयोजित विमोचन समारोह के दौरान मंच पर माइक से संबोधित करते हुए कृतिकार जगदीश सोनी और सोफे पर बैठे अन्य अतिथि नजर आ रहे हैं।
बारां। हिंदी साहित्य भारती की प्रदेश इकाई के तत्वावधान में शुक्रवार को कवि जगदीश सोनी की नव-प्रकाशित काव्य कृति 'काव्य क्रांति' का गरिमामय विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, वंदना एवं संगठन के ध्येय गीत के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत यथार्थ सोनी द्वारा किया गया। संस्था धर्मादा सभा भवन में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व देश प्रेम की जो भावना थी, उसमें आजादी के बाद अपेक्षाकृत कमी आई है और नैतिक मूल्यों का भी ह्रास हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में समाज में जागरण नितांत आवश्यक है। सनातन की रक्षा ही देश की रक्षा का सबसे सशक्त माध्यम है। केवल अहिंसा ही नहीं, अपितु धर्म की रक्षा करना भी हमारा परम धर्म है। डॉ. शुक्ल ने साहित्य के मूल स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चे साहित्य में कांता भाव, भारतीय संस्कृति और जनकल्याण की भावना होनी चाहिए। 'काव्य क्रांति' कृति में सामाजिक विद्रूपताओं को दूर करने का सराहनीय प्रयास किया गया है। मीडिया संयोजक प्रद्युम्न गौतम ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता कोटा के वरिष्ठ साहित्यकार योगेंद्र शर्मा ने की। इस अवसर पर अनुराग विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचस्थ रहे। कृति एवं कृतिकार का विस्तृत परिचय अश्विनी त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम का कुशल संचालन कोटा के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विजय जोशी ने किया। कृतिकार जगदीश सोनी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह पुस्तक नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के संस्कारों को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कामना की कि साहित्य हर घर का आभूषण बने। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक से अपनी चर्चित कविता "ए जिंदगी, मैं तेरी चुनौती स्वीकार करता हूं" का प्रभावी काव्य पाठ किया, जिसे उपस्थित प्रबुद्धजनों ने खूब सराहा। साहित्यिक संस्था सारस, राष्ट्रीय कवि संगम सहित अन्य संस्थाओं की ओर से कृतिकार सोनी का आत्मीय अभिनन्दन किया गया। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही, प्रदेश प्रतिनिधि सीताराम मीणा, जिलाध्यक्ष सरोज दीक्षित, प्रह्लाद मीणा, हरगोविंद जैन, पूरणमल नागर सहित नगर के अनेक साहित्य प्रेमी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
