बारां के काठ्याबाबा आश्रम में आचार्य परमानंद ने एसपी से मांगी सुरक्षा, साजिश का लगाया आरोप
बारां के काठ्याबाबा आश्रम से जुड़े आचार्य परमानंद ने एसपी को परिवाद देकर अपनी जान को खतरा बताया है। उन्होंने जानलेवा हमले, आश्रम से हटाने के दबाव और आर्थिक विवाद को एक बड़ी साजिश करार देते हुए निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

तस्वीर में आचार्य परमानंद पारंपरिक वेशभूषा में हाथ जोड़े खड़े हैं।
बारां के मांगरोल बाईपास स्थित काठ्याबाबा आश्रम से जुड़े आचार्य परमानंद ने जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु को परिवाद सौंपकर अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित षड्यंत्र करार देते हुए निष्पक्ष जांच का आग्रह किया है। आचार्य का आरोप है कि उन पर पूर्व में हुआ जानलेवा हमला, आश्रम छोड़ने का दबाव और उनकी निजी जमा राशि न लौटाया जाना एक ही साजिश के अलग-अलग हिस्से हैं।
आचार्य परमानंद ने बताया कि वे 1977 से 1980 तक बारां में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं और काठियाबाबा उनके दीक्षा गुरु थे। गुरु के देवलोक गमन के बाद वे जयपुर स्थित संघ कार्यालय में कार्यरत रहे, लेकिन कोरोना काल से पूर्व गुरु भाई सतीश अरोड़ा के आग्रह पर वे बारां आकर काठियाबाबा आश्रम की व्यवस्थाएं संभालने लगे। उनके वहां रहने के दौरान गौसेवा, धार्मिक अनुष्ठान, सुंदरकांड, हवन, गीता जयंती, महापुरुषों की जयंती, पर्यावरण संरक्षण, पत्रकार सम्मान, लोकतंत्र सेनानी सम्मान और कवि सम्मेलन जैसे नियमित आयोजनों से आश्रम एक प्रमुख धार्मिक-सामाजिक केंद्र बन गया।
हार्ट अटैक के बाद उपचार कराकर लौटने के कुछ समय बाद, एक रात आश्रम में अज्ञात युवक ने उन पर जानलेवा हमला किया। आरोपी ने उनका गला दबाया और हृदय पर लगातार मुक्कों से प्रहार किए, साथ ही दोबारा जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी को सफारी वाहन समेत गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर जमानत मिल गई। आचार्य ने इसे एक बड़ी साजिश की शुरुआत बताया। इसके बाद उन्हें आश्रम में कार्यक्रम बंद करने और वहां से जाने के लिए लगातार दबाव डाला गया। इंकार करने पर सीसीटीवी कैमरे हटवा दिए गए और गौसेवा जैसी गतिविधियों को रोक दिया गया, जिसके चलते वे पिछले चार माह से आश्रम नहीं जा रहे हैं।
आचार्य परमानंद ने सतीश अरोड़ा पर आर्थिक धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, अधिक ब्याज के आश्वासन पर जमा की गई उनकी निजी राशि न मिलने पर मांगने पर उन्हें चेक दिए गए, जिन्हें बैंक में लगाने पर जान से मारने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई। एक चेक बाउंस हो गया और दूसरे का भुगतान रुकवा दिया गया। उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक से अपनी व अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बकाया राशि दिलाने की मांग की है। एसपी ने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया है। घटना के बाद हृदय में तकलीफ बढ़ने पर वे जयपुर के अस्पताल में उपचाराधीन हैं। आचार्य ने भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते एक पत्र अपने विश्वस्त लोगों के पास सुरक्षित रखा है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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