बारां कांच घर: ऐतिहासिक भवन गिराने का विरोध, संरक्षण की मांग
बारां के 1911 में बने ऐतिहासिक राजकीय विद्यालय भवन को गिराने की प्रक्रिया शुरू होने पर व्यापारिक संगठनों ने आपत्ति जताते हुए संरक्षण की मांग की है।

तस्वीर में बारां के कोटा रोड स्थित ऐतिहासिक 'कांच घर' (राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय) का जर्जर पुराना पत्थर का भवन और दो विंगों को जोड़ता हुआ पुल दिखाई दे रहा है।
जिला मुख्यालय के कोटा रोड स्थित वर्ष 1911 में अंग्रेज शासनकाल के दौरान निर्मित ऐतिहासिक ‘कांच घर’ भवन को गिराए जाने की प्रक्रिया शुरू होने पर शहर के व्यापारिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठनों ने भवन को तत्काल गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाने तथा इसे पुरातात्विक धरोहर के रूप में संरक्षित रखने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है।
व्यापार महासंघ अध्यक्ष योगेश कुमरा बाटा, धान मंडी व्यापार संघ अध्यक्ष देवकीनन्दन बंसल, सर्राफा संघ अध्यक्ष ललित मोहन खंडेलवाल, यशभानु जैन, वैश्य महासम्मेलन युवा जिला अध्यक्ष भानु पोरवाल, जयनारायण हल्दिया, अश्विनी कुमार बंसल, कृषि उपज मंडी "क" वर्ग व्यापार संगठन अध्यक्ष मनीष लश्करी, धर्मदा संस्था के पूर्व अध्यक्ष विमल बंसल, हितेश कुमार सोनी, प्रमोद कुमार थुणगर, नरेश खंडेलवाल, आनंद बंसल सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि भवन को गिराने में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक इमारत को पुरातात्विक धरोहर के रूप में संरक्षित रखने के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाने चाहिए।
व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि बारां शहर के कोटा रोड स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का यह भवन वर्ष 1911 में निर्मित हुआ था। प्रारंभ में यहां ‘कांच घर’ संचालित होता था। आजादी के बाद इसी भवन में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का संचालन शुरू किया गया। रियासतकालीन यह भवन बारां शहर की अनूठी ऐतिहासिक धरोहर है। इसकी स्थापत्य कला विशेष आकर्षण का केंद्र है तथा यह शहर का एकमात्र ऐसा भवन है, जिसमें दो विंगों को जोड़ने के लिए पत्थरों का पुल बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि भवन के कई हिस्सों की स्थिति लंबे समय से जर्जर बनी हुई है, लेकिन सरकार की ओर से इसकी कभी पुख्ता मरम्मत नहीं कराई गई। पिछले वर्ष जुलाई माह में भवन की पिछली विंग का एक हिस्सा गिर गया था। इसके बाद गठित तकनीकी समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब पूरी पिछली विंग को गिराया जा रहा है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि उचित मरम्मत और संरक्षण के माध्यम से इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकता है।
व्यापारियों और आमजन ने राज्य सरकार से मांग की है कि भवन को तत्काल गिराने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने आग्रह किया है कि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन की पिछली विंग को गिराने की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाकर इसके संरक्षण एवं पुनर्स्थापन की समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि बारां की इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
