बारां में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा से सवाल पूछने से पत्रकारों को रोकने पर विवाद, प्रेस स्वतंत्रता पर उठे गंभीर सवाल
बारां में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा से सवाल पूछने से पत्रकारों को रोकने के कथित प्रयास पर विवाद गहरा गया। प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर पत्रकारों ने कड़ा विरोध जताया।

तस्वीर में राजस्थान के मंत्री झाबर सिंह खर्रा (लाल पगड़ी में) बैठे हुए नजर आ रहे हैं, जबकि उनके चारों ओर खड़ी भीड़ और पत्रकारों के बीच बातचीत और बहस की स्थिति दिखाई दे रही है।
बारां दौरे के दौरान राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा से सवाल पूछने से कुछ पत्रकारों को कथित रूप से रोके जाने की घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है। पत्रकारों ने इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
पत्रकारों के अनुसार वे शहर की सफाई व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, घर-घर कचरा संग्रहण, जर्जर सड़कों की स्थिति, जलभराव की समस्या, पट्टों के वितरण में कथित अनियमितताओं तथा नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार सहित विभिन्न जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा का पक्ष जानना चाहते थे। आरोप है कि शहरी शिविर के दौरान कुछ लोगों ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकने का प्रयास किया। इस घटना से आहत जिले के पत्रकारों ने एकजुट होकर नाराजगी व्यक्त की।
जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार दिलीप शाह, ललितमोहन खंडेलवाल, घनश्याम दाधीच, राजेंद्र शर्मा, राकेश गुप्ता, लक्ष्मण वर्मा, लक्ष्मीचंद नागर, योगेश गुप्ता, राधेश्याम शर्मा, रितेश शर्मा, वीरेंद्र सिंह बना, विष्णु भारद्वाज, सीबी पंकज, बृजेश पारेता, राजेश पंकज, हकीम पठान, बृजेश यादव, दीपांशु गेरा सहित अन्य पत्रकारों ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और जनता की समस्याओं को जनप्रतिनिधियों तथा सरकार तक पहुंचाना उनका दायित्व है।
पत्रकारों ने कहा कि किसी मंत्री या जनप्रतिनिधि से जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछना मीडिया का अधिकार ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी भी है। उनका कहना है कि पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकना न केवल प्रेस की स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि जनता के जानने के अधिकार पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में मीडिया कर्मियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार दोहराया गया तो पत्रकार संगठन एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मीडिया के अधिकारों और गरिमा का सम्मान सुनिश्चित करने की अपेक्षा जताई, ताकि लोकतंत्र की मूल भावना कायम रह सके।

Pratahkal Bureau
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