बारां: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी जांच रिपोर्ट! फर्जी अंकतालिकाओं पर बने 'मेल नर्स' को विभाग का संरक्षण, आखिर कब गिरेगी गाज?
बारां चिकित्सा विभाग में फर्जी अंकतालिकाओं के आधार पर नौकरी करने वाले मेल नर्स मोहम्मद शाहिद अंसारी का खुलासा। मध्य प्रदेश बोर्ड की जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने और जोन डायरेक्टर के आदेश के बावजूद बारां सीएमएचओ द्वारा कार्यवाही न करना गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। जानिए कैसे दूसरे के रोल नंबर पर हासिल की सरकारी नौकरी।

बारां। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और मिलीभगत का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारां जिले में फर्जी अंकतालिकाओं के दम पर सालों से सरकारी नौकरी का लुत्फ उठा रहे एक मेल नर्स के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बावजूद विभाग ने चुप्पी साध रखी है। स्थिति यह है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा दस्तावेजों को 'फर्जी' करार दिए जाने और उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के चार महीने बाद भी आरोपी विभाग की फाइलों के 'ठंडे बस्ते' में सुरक्षित बैठा है।
पूरा प्रकरण राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बमूलिया माताजी, अंता में तैनात मेल नर्स ग्रेड-2 मोहम्मद शाहिद अंसारी पुत्र सुल्तान मोहम्मद अंसारी से जुड़ा है। इस धांधली का खुलासा तब हुआ जब शहर की एक जागरूक महिला ने गत वर्ष मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को ज्ञापन सौंपकर अंसारी की शैक्षणिक योग्यताओं पर संदेह जताया। जांच की सुस्त रफ्तार से परेशान होकर अब फरियादिया ने सीधे चिकित्सा मंत्री का दरवाजा खटखटाया है, जिससे विभाग के भीतर मची खलबली और कथित सांठगांठ की परतें खुलने लगी हैं।
शिकायत के बाद जब संयुक्त निदेशक जोन कोटा और सीएमएचओ बारां ने मध्य प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल से दस्तावेजों का सत्यापन करवाया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मोहम्मद शाहिद अंसारी ने जिस हायर सेकेंडरी परीक्षा (वर्ष 1993) की अंकतालिका में खुद को प्रथम श्रेणी (634 अंक) से उत्तीर्ण दिखाया था, मंडल के रिकॉर्ड के अनुसार उस रोल नंबर (2111327) पर वास्तव में छत्रसाल सिंह पुत्र रामेश्वर सिंह का नाम दर्ज है, जिसने केवल 420 अंक प्राप्त कर द्वितीय श्रेणी हासिल की थी।
जालसाजी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। हाई स्कूल सर्टिफिकेट (वर्ष 1991) की अंकतालिका में भी भारी हेरफेर पाया गया। आरोपी की अंकतालिका में 496 अंकों के साथ प्रथम श्रेणी दर्ज है, जबकि भोपाल मंडल के आधिकारिक रिकॉर्ड में उस रोल नंबर (2122456) पर जगदीश प्रसाद लखेरे पुत्र हरप्रसाद लखेरे का नाम है, जो महज 217 अंक पाकर अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित था। मंडल ने 17 सितंबर 2025 को ही अपनी सत्यापन रिपोर्ट बारां सीएमएचओ को भेजकर यह प्रमाणित कर दिया था कि ये अंकतालिकाएं पूरी तरह फर्जी हैं और इनमें दूसरे छात्रों के विवरण में काट-छांट की गई है।
हैरत की बात यह है कि संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जोन कोटा द्वारा कार्यवाही के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद बारां सीएमएचओ कार्यालय और संबंधित लिपिक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। आरोप लग रहे हैं कि विभाग के कुछ कर्मचारी आरोपी कार्मिक से सांठगांठ कर उसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं और सरकार को हर माह लाखों रुपये के वेतन का चूना लगाया जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सीएमएचओ डॉ. संजीव सक्सेना का कहना है कि शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज प्राप्त हुए हैं और मामले को दिखवाया जा रहा है। हालांकि, जांच रिपोर्ट मिलने के चार महीने बाद भी 'देखने' की यह प्रक्रिया न्याय और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

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