बारां: कड़ाके की ठंड में महाकाल महिला मंडल ने बिखेरी सेवा की गर्माहट, मकर संक्रांति पर बच्चों के चेहरे पर आई मुस्कान
बारां में महाकाल महिला मंडल ने मकर संक्रांति के अवसर पर मेलखेड़ी छापर के राजकीय विद्यालय में गर्म वस्त्रों का वितरण कर मानवता की मिसाल पेश की। अध्यक्ष अनीता शर्मा व अन्य सदस्यों की उपस्थिति में हुए इस आयोजन में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साह दिखाया। जानिए कैसे इस सेवा कार्य ने कड़ाके की ठंड में बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी।

बारां। हाड़ौती के इस अंचल में जब शीतलहर अपना प्रचंड रूप दिखा रही है, तब मानवता और सेवा के संगम ने भविष्य के कर्णधारों के जीवन में खुशियों का नया रंग भर दिया है। शहर के कोटा रोड स्थित प्रतिष्ठित 'महाकाल महिला मंडल' ने मकर संक्रांति के पावन पर्व को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के संकल्प के साथ मनाया। मंडल की महिलाओं ने मेलखेड़ी छापर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय पहुंचकर वहां अध्ययनरत बालक-बालिकाओं के बीच ऊनी वस्त्रों का वितरण किया, जिससे ठिठुरते बच्चों को बड़ी राहत मिली है।
इस पुनीत कार्य का नेतृत्व मंडल की अध्यक्ष अनीता शर्मा ने किया। उनके साथ सेवा के इस कारवां में नीलम नरवाना, रजनी शर्मा, वर्षा सोनी, इनु अग्रवाल और गायत्री राठौर जैसे सक्रिय सदस्य कंधे से कंधा मिलाकर शामिल रहीं। वस्त्र वितरण के दौरान जब बच्चों को नए और गर्म कपड़े मिले, तो उनके चेहरों पर उपजी निश्छल मुस्कान ने आयोजन की सार्थकता को सिद्ध कर दिया। अध्यक्ष अनीता शर्मा ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि महाकाल महिला मंडल का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि समय-समय पर विभिन्न सामाजिक सरोकारों से जुड़कर समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की मदद करना भी मंडल की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम केवल दान-पुण्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक उत्सव का रूप देने के लिए मंडल सचिव रजनी शर्मा के सान्निध्य में कई सांस्कृतिक और शिक्षाप्रद गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रांगण में बच्चों ने कविता पाठ और अन्य रचनात्मक कार्यक्रमों में बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों की प्रतिभा और उनकी ऊर्जा ने उपस्थित सभी सदस्यों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान शिक्षा की महत्ता पर भी जोर दिया गया ताकि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर हों।
विद्यालय की संस्था प्रधान ने मंडल के इस अनुकरणीय पहल की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में इस तरह के सहयोग की सदैव आवश्यकता रहती है। जब स्वयंसेवी संस्थाएं आगे आकर शिक्षा और शिक्षार्थी के हित में कदम उठाती हैं, तो इससे न केवल विद्यालय का मनोबल बढ़ता है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाता है। यह कार्यक्रम न केवल कड़ाके की ठंड से सुरक्षा का माध्यम बना, बल्कि इसने सामुदायिक सहभागिता की एक नई मिसाल पेश की है।

Pratahkal Bureau
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