उठा खड़ग... रानी की वीरता से सामाजिक सरोकार तक, डोल मेले में देर रात तक गूंजा कवि सम्मेलन
बारां के ऐतिहासिक डोल मेले में शनिवार रात राजस्थानी कवि सम्मेलन में हास्य, वीर, शृंगार, करुण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने समां बांधा। सोमवार को पूजा राजस्थानी और जगदीश भाटी की प्रस्तुतियां होंगी।

तस्वीर में बारां के ऐतिहासिक डोल मेले के रंगमंच पर आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान मंच पर बैठे गणमान्य अतिथि और कवि नजर आ रहे हैं।
बारां। ऐतिहासिक डोल मेले का रंगमंच शनिवार की देर रात तक हाड़ौती की माटी की महक, ठेठ राजस्थानी अंदाज और कविता के नव रसों से सराबोर रहा। हाड़ौती के ख्यातनाम कवियों ने हास्य, शृंगार, वीर, करुण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं की प्रस्तुतियां दीं। देर रात तक पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ सूत्रधार पवन गोचर ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उन्होंने शृंगार रस को हाड़ौती के ठेठ अंदाज में पिरोते हुए “थारे काई हो गयो रूपाली, काया सूखती जारी, फिर भी गुटखा खा री…” जैसी पंक्तियों से माहौल में रंग भर दिया।
हास्य रस के कवि जसराज सलोना ने अपनी चुटीली प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। वहीं “ई भ्रूण हत्या पर रोक लगानी छ…” जैसी रचना के माध्यम से उन्होंने सामाजिक सरोकार का संदेश भी दिया।
मंच संचालन के साथ काव्य पाठ कर रहे बाबू बंजारा ने शौर्य के प्रतीक चेतक पर अपनी ओजपूर्ण रचना सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। “सूतो काई र छ चेतक, पवन वेग सु भाग…” की पंक्तियां गूंजते ही पंडाल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने हाड़ौती की प्रसिद्ध दाल-बाटी को अपने चिरपरिचित हास्य अंदाज में पिरोया तो श्रोताओं की हंसी छूट गई।
मध्य क्रम में विष्णु विश्वास ने “बोल-बोल मेहतरानी…” के माध्यम से समाज में व्याप्त छुआछूत पर तीखा प्रहार किया और सामाजिक समानता का संदेश दिया।
कवि सम्मेलन का भावनात्मक पक्ष मुकुटमणि राज की प्रस्तुतियों से उभरकर सामने आया। उन्होंने मार्मिक अंदाज में “नैना धरया पाओगा गेला म, भूल मत जाजो सा…” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। “पड़ी तीज री कोल, भूल मत जाजो सा…” और “पनघट रो तीर, अखियां में नीर…” जैसी रचनाओं की प्रस्तुति पर श्रोताओं की आंखें छलछला आईं।
कवयित्री चंदा पाराशर ने शृंगार रस की प्रस्तुति से दर्शकों का मन जीता, वहीं झालावाड़ की प्रतिमा पुलक ने “कंगन डोरा जद खुल जावे…” से खूब वाहवाही बटोरी। भेरूलाल भास्कर ने अपनी रचना में मेले के वास्तविक रंग और लोकजीवन का चित्रण किया, जबकि सोनू सुरीला की ओजपूर्ण प्रस्तुति “उठा खड़ग क्षण में रानी ने, खुद की नाड़ उड़ा दी…” पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी।
इसके अलावा नाथूलाल निर्भय, लालचंद सुमन, कमलेश कोकिला, सूरजमल मियाड़ा, सौभाग वैष्णव, देवकी दर्पण, चंपालाल राव और रमेश राजस्थानी सहित अन्य कवियों ने भी अपनी प्रभावी रचनाओं से देर रात तक समां बांधे रखा।
डोल मेला रंगमंच के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण वर्मा सागर ने बताया कि कार्यक्रम के आरंभ में मेला अध्यक्ष नीरज नागर ने सभी कवियों समेत उपसभापति तेजस सुमन, मोहित, पार्षद सोनू यादव, मनीष राठौर, संजय, नमन शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोगों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
मेला अध्यक्ष नीरज नागर ने बताया कि डोल मेला रंगमंच पर सोमवार की रात अनंत इवेंट के माध्यम से भव्य आर्केस्ट्रा कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें पूजा राजस्थानी एवं जगदीश भाटी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। मेले में लगातार बढ़ रही भीड़ के बीच आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर भी मेलार्थियों में उत्साह बना हुआ है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
