बारां: सड़क हादसों में मददगारों को अब दुआ के साथ मिलेगा इनाम, 'गुड सेमेरिटन' बनकर बचाएं लोगों की जान
बारां में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत डॉ. कल्पना शर्मा के निर्देशन में 'गुड सेमेरिटन' कार्यशाला आयोजित की गई। सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को अब 25 हजार रुपये का इनाम और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। जानें कैसे 'गोल्डन आवर' में जान बचाकर आप बन सकते हैं एक जिम्मेदार नागरिक और प्राप्त कर सकते हैं सरकारी प्रोत्साहन।

बारां। सड़क की असुरक्षित रफ्तार जब किसी जिंदगी को दांव पर लगा देती है, तब वहां मौजूद एक अनजान शख्स की त्वरित मदद मौत और जिंदगी के बीच का सबसे बड़ा अंतर बन सकती है। इसी मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी को जगाने के लिए बारां जिले में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। शनिवार को जिले के विभिन्न ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में 'गुड सेमेरिटन' (नेक मददगार) कार्यशालाओं का आयोजन कर आमजन को यह संदेश दिया गया कि "डरो मत, मदद करो।" इस पहल के जरिए न केवल लोगों को घायलों की मदद के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि केंद्र सरकार की उस प्रोत्साहन योजना से भी रूबरू कराया गया, जिसमें मददगार को दुआओं के साथ आर्थिक पुरस्कार का भी प्रावधान है।
प्रभारी अधिकारी डॉ. कल्पना शर्मा और जिला सड़क सुरक्षा समिति बारां के कुशल निर्देशन में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के शिकार व्यक्तियों को 'गोल्डन आवर' यानी दुर्घटना के पहले एक घंटे के भीतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यशाला के दौरान ग्रामीणों को विस्तार से समझाया गया कि सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने या एम्बुलेंस को कॉल करने वाला व्यक्ति कानूनी झंझटों से पूरी तरह मुक्त है। केंद्र सरकार की गुड सेमेरिटन योजना के तहत अब जान बचाने वाले नेक व्यक्ति को 25 हजार रुपए के इनाम से नवाजा जाता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस या अस्पताल प्रशासन किसी भी मददगार पर रुकने, गवाह बनने या पूछताछ का दबाव नहीं बना सकता, जिससे आमजन निडर होकर सेवा भाव से आगे आ सकें।
अभियान की जमीनी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सहायक प्रोग्रामर प्रमोद पांडे, सुरेश मीना और मनोज चौधरी की टीम ने बारां मुख्यालय सहित बोहत, मांगरोल, रामगढ़, रेलावन, गरड़ा, केलवाड़ा, भंवरगढ़ और किशनगंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई। टीम ने इन क्षेत्रों के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों, पुलिस थानों, चौकियों और व्यस्त चौराहों पर जाकर लोगों को यातायात नियमों के प्रति सचेत किया। कार्यक्रम के दौरान पंपलेट वितरित किए गए और संवाद के जरिए यह समझाया गया कि एक जिम्मेदार नागरिक वही है जो संकट के समय हाथ पीछे खींचने के बजाय अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर तक घायल को पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाए।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत बारां में चलाया गया यह अभियान केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज में 'मदद की संस्कृति' को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त प्रयास है। जिस प्रकार ग्रामीण अंचलों में टीम ने लोगों से सीधा संवाद किया, उससे यह उम्मीद जगी है कि अब कानूनी पचड़ों के डर से कोई घायल सड़क पर तड़पने को मजबूर नहीं होगा। प्रशासन का यह कदम न केवल मौतों के आंकड़े कम करने में सहायक होगा, बल्कि समाज में एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता और सुरक्षा के भाव को भी मजबूती प्रदान करेगा।

Pratahkal Bureau
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