बारां: बीलखेड़ा डांग के दुर्गम अंचल में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, 195 ग्रामीणों को मिला जीवनदायी उपचार
बारां के बीलखेड़ा डांग में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 195 सहरिया मरीजों का उपचार किया गया। नेटवर्क विहीन इस दुर्गम क्षेत्र में डॉ. राहुल मेहता और संकल्प सोसाइटी मामोनी ने एसबीआई सिक्योरिटीज के सहयोग से जेनेरिक दवाएं और चिकित्सा परामर्श प्रदान किया। चर्म रोग और मौसमी बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए यह शिविर एक बड़ी राहत बनकर उभरा है।

बारां/शाहाबाद। राजस्थान के बारां जिले के सुदूर वनांचल में बसे बीलखेड़ा डांग गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की एक नई किरण पहुंची है। बुधवार, 7 जनवरी को इस दुर्गम क्षेत्र में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से सहरिया समुदाय के 195 मरीजों का सफल उपचार किया गया। यह आयोजन न केवल चिकित्सा सहायता का जरिया बना, बल्कि उन अभावों पर भी चोट कर गया जहां आधुनिकता की पहुंच आज भी सीमित है। कार्यक्रम से जुड़े फिरोज खान ने बताया कि बीलखेड़ा डांग एक ऐसा क्षेत्र है जहां मोबाइल नेटवर्क तक की पहुंच नहीं है, जिसके कारण सूचनाओं के आदान-प्रदान में भारी बाधा आती है। ऐसी विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं का घर-घर पहुंचना किसी वरदान से कम नहीं है।
शिविर के दौरान मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल मेहता ने अपनी विशेषज्ञ सेवाओं से मरीजों का परीक्षण किया, जबकि नर्सिंग ऑफिसर दिनेश राठौर ने मरीजों को दवाइयों का वितरण सुनिश्चित किया। शिविर में मुख्य रूप से दाद, खुजली, खांसी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द जैसी मौसमी बीमारियों का उपचार किया गया। इसके अतिरिक्त, महिलाओं में गुप्त रोग संबंधी समस्याओं का गहन परीक्षण कर उन्हें उचित परामर्श और औषधियां उपलब्ध कराई गईं। डॉ. राहुल मेहता ने इस अवसर पर कहा कि अस्पताल की दूरी अधिक होने के कारण सहरिया समुदाय के लोग अक्सर उपचार से वंचित रह जाते हैं, जिससे छोटी बीमारियां गंभीर रूप ले लेती हैं। उन्होंने पाया कि शिविर में पहुंचने वाले मरीजों में महिलाओं और बच्चों में चर्म रोगों की अधिकता देखी गई।
इस मानवीय पहल के पीछे संकल्प सोसाइटी मामोनी का विशेष प्रयास रहा। संस्था के चेयरमैन नंदकिशोर शर्मा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शाहाबाद ब्लॉक के अति पिछड़े और दूर-दराज के गांवों में एसबीआई सिक्योरिटीज (SBI Securities) के सहयोग से यह चिकित्सा अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। इन शिविरों की विशेषता यह है कि यहां मेडिकल ऑफिसर और नर्सिंग अधिकारियों द्वारा मौके पर ही जांच कर उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में समानता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
शिविर के सफल क्रियान्वयन में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और सहयोगियों ने कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया। सामाजिक कार्यकर्ता चंदालाल भार्गव, रामनिवास सहरिया सहित मां-बाड़ी डे केयर केंद्र के शिक्षा सहयोगियों का इस पुनीत कार्य में विशेष योगदान रहा। बीलखेड़ा डांग जैसे नेटवर्क विहीन और संसाधनों से कटे हुए गांवों में इस तरह के स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन न केवल तात्कालिक राहत प्रदान करता है, बल्कि यह हाशिए पर खड़े समुदायों में शासन और समाज के प्रति विश्वास को भी सुदृढ़ करता है।

Pratahkal Bureau
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