वन भूमि पर अवैध कब्जा और पर्यावरण का नुकसान

ज्ञापन में ग्रामवासियों ने बताया कि:

  • महोदरी नाथान, महोदरी, खेरवा, सिमलोद, सिंगरी, मोयदा व लकड़ाई गांव में पिछले कई वर्षों से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ है।
  • अतिक्रमियों ने वन भूमि के हरे-भरे पेड़ों को काटकर समतल कर दिया और फसल की बुवाई की हुई है।
  • अतिक्रमियों ने वनभूमि पर कई जगह फसल के साथ-साथ मकानों का निर्माण तक कर रहना शुरू कर दिया है।
  • अतिक्रमियों द्वारा इन गांवों की वनभूमि को कृषि भूमि में बदला जा रहा है। इससे पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है।
  • वनभूमि नष्ट होने से वन्यजीव-जंतुओं का जीवन समाप्त होता जा रहा है।

ग्रामवासियों की मांग और अधिकारियों की उदासीनता

"ज्ञापन में ग्रामवासियों ने मांग की है कि शीघ्र इन सभी गांवों से अतिक्रमण हटाकर पौधारोपण करवाया जाए। ताकि वनभूमि का अस्तित्व बना रहे।"

इस संबंध में पूर्व में शिकायत की गई, लेकिन अतिक्रमण हटाने को लेकर स्थानीय वनाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की है। जिससे अतिक्रमियों के हौंसले बुलंद हो रहे है।


ज्ञापन देने वाले ग्रामवासी

ज्ञापन में शामिल प्रमुख नाम:

  • समाजसेवी दशरथ सिंह, शिवप्रकाश, सुरेश, गिर्राज लोधी
  • गीताबाई खेरवा, बजरंगलाल, लक्ष्मीनाथ योगी
  • नंजी भील, द्रोपदी भील, हरिओम, कजोड़ योगी आदि।
Pratahkal Bureau

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