बारां। बारां जिले के रामगढ़ कैटर वाले संरक्षित वन अभ्यारण्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से केपी-2 (केपी-2) चीते का छठी बार आगमन होना यह स्पष्ट करता है कि बारां जिले के जंगल इस प्रजाति के लिए अनुकूल, सुरक्षित और प्राकृतिक रूप से आकर्षक हैं। यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि आवास-उपयुक्तता का मजबूत संकेत है।

आवास-उपयुक्तता का वैज्ञानिक प्रमाण

इंटैक इंटेक एडवाइजरी कमेटी, बारां के चेयरमैन विष्णु साबू तथा शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के संरक्षक एवं इंटेक सदस्य प्रशांत पाटनी ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि बार-बार ट्रेंकुलाइज कर चीते को वापस भेजना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। इसके बजाय, बारां जिले के जंगलों में वैज्ञानिक दृष्टि से उसकी आवासीय व्यवस्था करने की आवश्यकता है। विष्णु साबू ने कहा कि "किसी वन्यजीव का बार-बार उसी भू-भाग में लौटना उसके भोजन, पानी, आवरण और कम मानवीय हस्तक्षेप जैसे अनुकूल कारकों का प्रमाण होता है। बारां के वन परिदृश्य में ये सभी तत्व मौजूद हैं।"

जैव-विविधता और सुरक्षित गलियारे

प्रशांत पाटनी ने कहा कि चीते का लगातार बारां की ओर आकर्षित होना बताता है कि यहां जैव-विविधता, शिकार-आधार और प्राकृतिक गलियारे उपलब्ध हैं। ट्रेंकुलाइजेशन से तनाव बढ़ता है; इसके स्थान पर सह-अस्तित्व आधारित प्रबंधन अपनाया जाना चाहिए। दोनों पर्यावरण प्रेमियों ने सुझाव दिया कि बारां के चयनित वन क्षेत्रों में पायलट चीता-हैबिटैट ज़ोन विकसित किए जाएं। वैज्ञानिक आकलन जिसमें प्रे-बेस, जलस्रोत और कॉरिडोर शामिल हों, के आधार पर स्थायी प्रबंधन योजना बने। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी और मुआवज़ा व जागरूकता तंत्र सुदृढ़ किया जाए।

वैश्विक चीता कॉरिडोर परियोजना को बल

राज्य और केंद्र के बीच समन्वय से दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति लागू हो। वक्तव्य में यह भी कहा गया कि बारां शाहबाद घाटी का भू-दृश्य पश्चिम मध्य भारत के वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर से जुड़ने की क्षमता रखता है। यदि समय रहते आवासीय व्यवस्था की गई, तो यह क्षेत्र चीतों के संरक्षण में एक नया मॉडल बन सकता है और रामगढ़ से सीताबाड़ी होते हुए शाहबाद जंगल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्व की सबसे बड़ी चीता कॉरिडोर परियोजना को बल मिल जाएगा। अंत में दोनों ने वन विभाग व जिला प्रशासन से आग्रह किया कि प्राकृतिक संकेतों को समझते हुए संरक्षण-उन्मुख निर्णय लिए जाएं, ताकि बारां जिले के जंगल चीतों के सुरक्षित भविष्य का साक्षी बन सकें।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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