फतेहपुर में सरकारी जमीनों पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई कार्रवाई की गुहार
बारां के फतेहपुर गांव में सरकारी भूमि और भवनों पर अवैध कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग की।

तस्वीर में बारां जिले के फतेहपुर गांव के ग्रामीण हाथों में चारागाह और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग का बैनर थामे खड़े नजर आ रहे हैं।
बारां जिला मुख्यालय के समीपवर्ती फतेहपुर गांव में सरकारी चारागाह भूमि और सार्वजनिक भवनों पर अवैध कब्जों को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लंबे समय से सरकारी संपत्तियों का निजी उपयोग कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्ष 2022 से लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक चारागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया गया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की चारागाह भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है और वहां हर साल फसल बोई जाती है। इसके चलते गांव के मवेशियों के चरने के लिए जगह नहीं बची है। ग्रामीणों का कहना है कि चारे के अभाव में पशुओं की मौत तक हो रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा पूर्व में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन दबंगों ने दोबारा कब्जा कर लिया। उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर कब्जे के कारण गांव में पशुपालन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि तिलमसंघ, दफ्तर, मवेशी अस्पताल, स्कूल और पंचायत भवन जैसे सरकारी भवनों पर भी पिछले 5 वर्षों से दबंगों का कब्जा है। आरोप है कि इन भवनों का उपयोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी करने, मवेशी बांधने और गंदगी फैलाने के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि जब वे इसका विरोध करते हैं तो उन्हें गालियां दी जाती हैं और धमकाया जाता है।
ग्रामीणों ने रामप्रसाद उर्फ पप्पू नामक व्यक्ति पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि उसने चारागाह भूमि से लाखों रुपये की मिट्टी खुदवाकर बेच दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इसका विरोध किया और पटवारी को भी इसकी सूचना दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि तहसीलदार को मौके पर भेजकर वास्तविक स्थिति की जांच करवाई जाए और सरकारी भूमि व भवनों को दबंगों के कब्जे से मुक्त कराया जाए। साथ ही, भविष्य में दोबारा अतिक्रमण नहीं करने के लिए संबंधित लोगों को पाबंद करने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन देने वालों में श्रीकिशन घाटिवाल, धनराज सोन, कल्लू सिगलीगर, रेवडीलाल हरिजन, रमेश रेदास, मदनलाल प्रजापति, सूरज यादव, राधाकिशन सुमन समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
